। शुल्क जमा करने के लिए कौंसिल ने अपनी वेबसाइट पर फॉर्म भी जारी किया है। अधिवक्ताओं को वहीं से फॉर्म अपलोड कर पांच सौ रुपये का नवीनीकरण शुल्क का बैंक ड्राफ्ट बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश, प्रयागराज के पक्ष में देय बनवाकर अपने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव से प्रमाणित करवाकर जमा करना होगा।
उत्तर प्रदेश बार कौंसिल की ओर से सीओपी (सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस) नवीनीकरण शुक्ल बढ़ाए जाने को लेकर अधिवक्ताओं में आक्रोश बढ़ गया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसका विरोध किया जाएगा। उत्तर प्रदेश बार कौंसिल ने आदेश जारी कर सीओपी नवीनीकरण शुल्क को 100 रुपये से बढ़ाकर पांच सौ रुपये कर दिया है।
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कहा है कि यह शुल्क उन अधिवक्ताओं को जमा करना होगा, जिनको पूर्व में सीओपी जारी किया जा चुका है और उनके सीओपी की वैधता समाप्त होने वाली है। शुल्क जमा करने के लिए कौंसिल ने अपनी वेबसाइट पर फॉर्म भी जारी किया है। अधिवक्ताओं को वहीं से फॉर्म अपलोड कर पांच सौ रुपये का नवीनीकरण शुल्क का बैंक ड्राफ्ट बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश, प्रयागराज के पक्ष में देय बनवाकर अपने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव से प्रमाणित करवाकर जमा करना होगा।
बार कौंसिल की ओर से बढ़ाए गए शुल्क का पत्र जारी होते ही अधिवक्ताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन केपूर्व संयुक्त सचिव आशुतोष पांडेय, अधिवक्ता दिलीप कुमार यादव, पवन कुमार सिंह, वेणु गोपाल, अमरेंदु सिंह आदि ने आपत्ति जाहिर की। कहा कि बार कौंसिल ने 2018 में सीओपी नवीनीकरण शुक्ल 100 रुपये किया था। अधिवक्ता कोरोना काल से उबर नहीं सके हैं और कौंसिल ने नवीनीकरण शुल्क बढ़ाकर पांच सौ रुपये कर दिया। उन्होंने शुल्क वृद्धि वापस लेने की मांग की है।