शुक्रवार को घोषित किए गए प्रत्याशियों की सूची में भाजपा ने शहर पश्चिम से सिद्धार्थनाथ सिंह, शहर दक्षिण से नंद गोपाल गुप्ता नंदी, मेजा से नीलम करवरिया और फूलपुर से प्रवीण पटेल को फिर से टिकट दिया है।
भाजपा ने प्रयागराज की 12 विधानसभा सीटों में से छह सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी। इसमें चार सीटों पर मौजूदा विधायकों पर ही भरोसा जताते हुए फिर से उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि दो सीटों फाफामऊ और कोरांव सीट पर मौजूदा विधायकों का टिकट काट दिया गया है।
शुक्रवार को घोषित किए गए प्रत्याशियों की सूची में भाजपा ने शहर पश्चिम से सिद्धार्थनाथ सिंह, शहर दक्षिण से नंद गोपाल गुप्ता नंदी, मेजा से नीलम करवरिया और फूलपुर से प्रवीण पटेल को फिर से टिकट दिया है। यह चारों वर्तमान में इसी सीट से भाजपा के विधायक हैं और नंदी और सिद्धार्थनाथ सिंह तो योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी हैं।
फाफामऊ से विधायक विक्रमाजीत मौर्य का टिकट काटकर गुरु प्रसाद मौर्य को दे दिया गया है, जबकि कोरांव सुरक्षित से राजमणि कोल के स्थान पर आरती कोल को प्रत्याशी बनाया गया है। बताया जाता कि पार्टी के आंतरिक सर्वेक्षण के आधार पर टिकट तय किए गए हैं। विक्रमाजीत मौर्य और राजमणि कोल के खिलाफ क्षेत्र के लोगों में नाराजगी थी।
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भाजपा
- फोटो : prayagraj
कुछ सीटें घटक दलों को दे सकती है बीजेपी
प्रयागराज की शेष छह सीटों पर पार्टी ने अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। माना जा रहा है कि इसमें से कुछ सीटें गठबंधन में शामिल सहयोगी दलों को दी जा सकती हैं। शहर उत्तरी, हंडिया, प्रतापपुर, बारा, करछना और सोरांव की सीटों में से कुछ पर अपना दल एस और निषाद पार्टी के प्रत्याशियों को देने की चर्चा चल रही है।
इसी तरह भाजपा ने प्रतापगढ़ में रामपुर खास से नागेश प्रताप सिंह छोटे सरकार, बाबागंज सुरक्षित से केशव पासी, कुंडा से सिंधुजा मिश्रा और पट्टी से राजेंद्र प्रताप सिंह मोती को टिकट दिया है। मोती सिंह पट्टी से निवर्तमान विधायक के साथ प्रदेश की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी हैं। इसी तरह कौशाम्बी की मंझनपुर सुरक्षित सीट से लाल बहादुर को फिर भाजपा ने टिकट दिया है।
दोनों विधायकों से जनता में थी नाराजगी
कोरांव और फाफामऊ विधानसभा के वर्तमान विधायकों के टिकट काटे जाने की पटकथा पहले ही लिख दी गई थी। इन दोनों से ही क्षेत्रीय लोगों में खासी नाराजगी थी। पिछले चुनाव में राजमणि कोल प्रयागराज में सर्वाधिक मत पाकर कोरांव से निर्वाचित हुए थे, लेकिन विधायक बनने के बाद वह जनता की कसौटी पर खरे नहीं उतरे। संघ पदाधिकारियों के साथ ही भाजपा प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेताओं से भी लोगों ने उनकी शिकायत की।
इसी तरह फाफामऊ विधायक विक्रमाजीत मौर्य डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के भले ही करीबी रहे हों लेकिन क्षेत्र में उनकी सक्रियता को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे। गिने चुने कार्यकर्ताओं को महत्व देने की वजह से काफी कार्यकर्ताओं में असंतोष था। क्षेत्र की कुछ सड़कों का निर्माण न होने की वजह से भी लोगों में नाराजगी रही। अमर उजाला ने भी पूर्व में इन दोनों विधायकों के टिकट काटे जाने की अटकलों को लेकर समाचार प्रकाशित किया था।
आरती कोल
भारतीय जनता पार्टी कोरांव 265 सुरक्षित विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनीं आरती कोल पूर्व में एक बार जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। विधानसभा क्षेत्र के पचेड़ा गांव की मूल निवासी हैं। आरती कोल मौजूदा समय में भारतीय जनता पार्टी प्रयागराज में जिला मंत्री के पद पर पदासीन हैं। इनका मायका भी काफी पहले से राजनीतिक क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
भाईलाल कोल सोनभद्र के सांसद भी रहे हैं। यह पिछले 10 सालों से बीजेपी की पदाधिकारी हैं। यह एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार की हैं। इनके पति खनन विभाग में कार्यरत हैं। एक पुत्र और एक पुत्री हैं। पिछली बार 2017 में टिकट मिलते मिलते रह गया था। तब भी पार्टी में पूरी निष्ठा से लगातार कार्य करती रहीं।
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Prayagraj News : गुरु प्रसाद मौर्य, भाजपा प्रत्याशी, फाफामऊ।
- फोटो : प्रयागराज
गुरु प्रसाद मौर्य
254 विधानसभा फाफामऊ के भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी गुरु प्रसाद मौर्य भारतीय जीवन बीमा निगम के अभिकर्ता रहने के साथ राजनीतिक की शुरुआत की। मौर्य बसपा के कद्दावर नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में राजनीति शुरू किया। विधानसभा नवाबगंज से बसपा से चुनाव में जीत हासिल करते हुए राजनीति में सक्रिय रहे। देश व प्रदेश की राजनीति में परिवर्तन की लहर के बीच गुरु प्रसाद मौर्य भाजपा में शामिल हो गए।
नीलम करवरिया
काफी ऊहापोह के बाद आज मेजा विधानसभा में विधायक नीलम करवरिया को भाजपा ने अपना प्रत्याशी घोषित किया है। नीलम करवरिया 2017 के विधानसभा चुनाव में लगभग 20000 मतों से अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के रामसेवक पटेल को पराजित कर मेजा से पहली महिला विधायक होने का गौरव प्राप्त किया था।
प्रवीण पटेल
फूलपुर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के घोषित प्रत्याशी प्रवीण कुमार सिंह पटेल पुत्र स्वर्गीय महेंद्र प्रताप सिंह फूलपुर तहसील क्षेत्र के अंदावा, सराय इनायत झूंसी के रहने वाले हैं। प्रत्याशी प्रवीण पटेल मौजूदा समय में भाजपा के फूलपुर विधायक हैं। परिवार की राजनैतिक पृष्ठभूमि रही है। इनके पिता स्व. महेंद्र प्रताप सिंह झूंसी विधानसभा क्षेत्र से एक बार कांग्रेस और दो बार जनता दल से विधायक चुने गए थे।
उनके निधन के बाद प्रवीण पटेल की मां सुशीला देवी भी जनता दल से चुनाव लड़ीं, लेकिन उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बाद प्रवीण पटेल वर्ष 2007 में पहली बार बहुजन समाज पार्टी से चुनाव लड़े और जीत दर्ज की। फिर उन्होंने वर्ष 2012 में फूलपुर विधानसभा से बहुजन समाज पार्टी से चुनाव लड़ा और हार गए।
इसके बाद वह भाजपा में शामिल हो गए और 2017 भाजपा के टिकट पर फूलपुर से विधायक चुने गए। वर्ष 2022 में भी भाजपा ने उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित किया है। उनकी पत्नी गोल्डी पटेल भी पिछले पंचवर्षीय योजना में जिला पंचायत सदस्य रही हैं।
इलाहाबाद शहर दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र से विधायक एवं कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी को पार्टी ने फिर प्रत्याशी बनाया है। इलाहाबाद के बहादुरगंज मुहल्ले में 23 अप्रैल 1974 को जन्मे नंदी के पिता सुरेश चंद्र डाक विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। मां विमला देवी घर में सिलाई, बुनाई करती थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते नंदी सिर्फ हाईस्कूल तक ही पढ़ सके।
शुरू हुआ सियासी सफर
वर्ष 2007 में बसपा के साथ मिलकर सियासी पारी खेलने उतरे नंदी ने शहर दक्षिणी से चुनाव जीता। उन्होंने भाजपा के कद्दावर नेता केशरी नाथ त्रिपाठी और कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी को हराया। इनाम के रूप में बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया।
12 जुलाई 2010 को जानलेवा हमले के बाद चार महीने नंदी हॉस्पिटल में भर्ती रहे। 2012 के चुनाव में नंदी सपा प्रत्याशी हाजी परवेज अहमद से 414 मतों से पराजित हुए।
इसके बाद उनकी पत्नी अभिलाषा गुप्ता 2012 में हुए नगर निगम चुनाव में महापौर चुनी गई। 2014 लोकसभा चुनाव में मंत्री नंदी कांग्रेस के टिकट से इलाहाबाद के प्रत्याशी रहे और एक लाख से अधिक मत हासिल किया। इसे देखते हुए कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में उन्हें मंडल प्रचार प्रभारी बनाया।
2017 विधानसभा चुनाव में बीजेपी में शामिल हुए और सपा विधायक परवेज अहमद टंकी को हराकर एक बार फिर कैबिनेट मंत्री का पद हासिल किया। 2007 में शहर दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र से जब वे पहली बार चुनाव लड़े थे तो उन्हें 35 हजार वोट मिले थे। 2012 में दुबारा चुनाव लड़े तो 48 हजार वोट मिले, वहीं 2013 में महापौर के चुनाव में अभिलाषा गुप्ता नंदी को एक लाख आठ हजार वोट मिले, वहीं सभी की जमानत जब्त हो गई थी।
2014 में कांग्रेस के टिकट से लोकसभा का चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में भी मंत्री नंदी को एक लाख से अधिक वोट मिले थे। 2017 में जब वे फिर चुनाव लड़े तो 93 हजार 11 मतों से विजई हुए। शहर दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र में इस समय मतदाताओं की संख्या चार लाख, 02 हजार 664 तो वहीं मकानों की संख्या 87 हजार 263 है।
प्रोफाइल
नाम- नंद गोपाल गुप्ता नंदी
पत्नी- अभिलाषा गुप्ता (मेयर)
उम्र- 43 साल
पिता- सुरेश चंद्र
माता- विमला देवी
बेटे- अभिषेक व नमन
बेटी- जाह्नवी
राजनीतिक करियर
2007 में प्रयागराज शहर दक्षिण से बसपा एमएलए और सरकार में कैबिनेट मंत्री।
2012 में सपा कैंडिडेट हाजी परवेज से 400 वोटों से पराजित।
2014 में कांग्रेस के टिकट से इलाहाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़े और भाजपा के श्यामाचरण गुप्त से पराजित हुए।
2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा में शामिल होकर इलाहाबाद दक्षिण सीट से चुनाव जीते।
अतीक के गढ़ में पहली बार सिद्धार्थनाथ ने खिलाया था कमल
माफिया अतीक अहमद का गढ़ कहे जाने वाले इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से वर्ष 2017 में पहली बार कमल खिलाने का श्रेय कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह के नाम ही है। पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री के नाती होने के साथ वह कायस्थ बिरादरी के प्रयागराज में बड़े राजनीतिक चेहरा भी हैं।
कैबिनेट मंत्री का पदभार संभाल रहे 58 वर्ष के सिद्धार्थ नाथ सिंह यूपी की सियासत में आने से पहले लंबे समय तक बीजेपी संगठन में काम कर चुके हैं। उनके मंत्री बनने के बाद शहर पश्चिम की तस्वीर काफी बदल चुकी है।
सिद्धार्थ नाथ की पत्नी डॉ. नीता सिंह हैं। उनके दो पुत्र सिद्धांत और निशांत सिंह हैं। पिता का नाम विजय नाथ सिंह एवं मां सुमन शास्त्री जो लाल बहादुर शास्त्री की छोटी बेटी थीं। पिछले चुनाव में उन्होंने 25 हजार से ज्यादा मतों से सपा प्रत्याशी ऋचा सिंह को शिकस्त दी थी।
गठबंधन को बारा सीट दिए जाने से नाराजगी
बारा विधानसभा सीट भाजपा के सहयोगी अपना दल को दिए जाने से शंकरगढ़ उद्योग व्यापार कल्याण समिति ने नाराजगी जताई है। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों का कहना है कि बारा विधानसभा सीट भाजपा को ही मिलनी चाहिए। संगठन के अध्यक्ष मूलचंद्र अग्रवाल, महामंत्री रतन केसरवानी, दीपक केसरवानी ने कहा कि बारा विधानसभा की 60 प्रतिशत आबादी पिछड़ी एवं कम पढ़ी लिखी है। जो सिर्फ भाजपा के चुनाव चिह्न कमल के फूल को ही पहचानती है। इसलिए इस सीट से भाजपा ही अपना उम्मीदवार खड़ा करे। इसी तरह भाजपा सभासद सुजीत केसरवानी ने भी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखकर बारा विधानसभा सीट भाजपा को ही दिए जाने की मांग की है।
यमुनापार से पहली बार भाजपा ने दो महिलाओं को दिया टिकट
भाजपा ने पहली बार यमुनापार की दो विधानसभा सीट से महिला प्रत्याशी को उम्मीदवार बनाया है। मेजा से नीलम करवरिया और कोरांव से आरती कोल को प्रत्याशी बनाए जाने की घोषणा के बाद यमुनापार में भाजपा नेताओं ने जश्न मनाने के साथ पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को बधाई दी।
विधानसभा मेजा से विधायक नीलम करवरिया को पार्टी प्रत्याशी बनाए जाने केबाद भाजपा नेता दिलीप चतुर्वेदी ने बताया कि विधायक नीलम करवरिया ब्राम्हण परिवार व राजनैतिक क्षेत्र की धुरी मानी जाती है। जिलाध्यक्ष यमुनापार विभव नाथ भारती ने दोनों महिला प्रत्याशी को एतिहासिक जीत की अग्रिम शुभकामनाएं दीं। बधाई देने वालों में पुष्पराज सिंह पटेल, राजेश शुक्ला, विक्त्रस्मादित्य मौर्य, विजय शंकर शुक्ला, हरिदेव धूरिया आदि मौजूद रहीं।