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विवि में हड़ताल जारी, कर्मचारियों ने बनाई मानव श्रृंखला

Tue, 07 Mar 2017 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कुलपति की अपील का भी कोई लाभ नहीं हुआ और कर्मचारियों की हड़ताल सोमवार को भी जारी रही। इसकी वजह से लगातार छठे दिन कोई काम नहीं हुआ। कुलपति को हटाने समेत विभिन्न मांगों के समर्थन में उन्होंने सीनेट हॉल के चारों तरफ मानव श्रृंखला बनाई। कर्मचारी अपनी रुख पर अडिग हैं। ऐसे में गतिरोध खत्म होता भी नहीं दिख रहा।
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विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारियों ने मंगलवार से दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल की घोषणा की थी लेकिन बुधवार को मिनिस्टीरियल एंड टेकिभनकल स्टॉफ यूनियन के अध्यक्ष डॉ.संतोष सहाय से छात्र नेता ने मारपीट कर ली थी। इसके बाद कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। कुलपति ने रविवार को कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की थी लेकिन वे पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत उन्होंने सोमवार को मानव श्रृंखला बनाई।

कर्मचारियों के समर्थन में छात्रसंघ पदाधिकारी भी शामिल हुए। इसके बाद हुई सभा में कर्मचारी और छात्र नेताओं ने सूर्य प्रकाश मिश्र पर हुए हमले की भी निंदा की। कर्मचारियों का कहना था कि  उनकी मांगों के बाबत विश्वविद्यालय प्रशासन पहले आदेश जारी करे। तब वे काम पर लौटेंगे। आंदोलन के समर्थन में ट्रेड यूनियन के जिला अध्यक्ष सुब्रत बनर्जी, जिला पंचायत सदस्य शिवशंकर ओझा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह आदि भी पहुंचे।
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इलाहाबाद। कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीएससी और एमएससी करने वाली दो छात्राओं का भविष्य भी दांव पर लग गया है। उनकी अमेरिका में नौकरी लगी है। ऐसे में वे सोमवार को डिग्री लेने के लिए विश्वविद्यालय पहुंचीं लेकिन उन्हें खाली हाथ वापस होना पड़ा। काउंटर बंद होने की वजह से छात्राओं ने रजिस्ट्रार से संपर्क किया तो उन्होंने परीक्षा नियंत्रक के पास भेज दिया। परीक्षा नियंत्रक कार्यालय से छात्राओं को बताया गया कि लेखा विभाग यदि फीस जमा कर ले तो आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है। इसके बाद छात्राएं वित्त अधिकारी के पास पहुंची लेकिन कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से फीस जमा नहीं हो पाई। ऐसे में उनकी डिग्री बनने की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो पाई। इस तरह की समस्याओं को लेकर कई अन्य छात्र भी भटकते दिखे।

इतना ही नहीं हड़ताल की वजह से वार्षिक और प्रवेश परीक्षा लंबित होने का भी अंदेशा बन गया है। प्रवेश परीक्षा के लिए निदेशक और समन्वयकों की घोषणा कर दी गई है लेकिन कर्मचारियों के काम नहीं करने की वजह से आगे की प्रक्रिया ठप है। इसी तरह से मेडिकल, लीगल सेल समेत अन्य अनुभाग के काम भी ठप हो गए हैं। रजिस्ट्रार प्रोफेसर एनके शुक्ला का कहना है विश्वविद्यालय प्रशासन कर्मचारियों की मांग पूरी करने का लिखित आश्वासन दे चुका है लेकिन हड़ताल की वजह से उनका काम भी नहीं हो पा रहा है। उन्होंने वार्षिक परीक्षा तथा छात्र-छात्राओं के हित को देखते हुए हड़ताल समाप्त करने की अपील की।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बने गतिरोध के बीच वार्षिक परीक्षा की तैयारियों की समीक्षा के लिए मंगलवार को कालेज प्राचार्यों तथा इससे जुड़े अफसरों की बैठक बुलाई गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही परीक्षा कराने की तैयारी में है। बैठक में इसके विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा। परीक्षा विभाग से जुड़े एक अफसर ने बताया कि वार्षिक परीक्षा अध्यापक कराते हैं। कर्मचारी सहयोग करते हैं। ऐसे में परीक्षा कराने में कोई बाधा नहीं है। इससे इतर परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर एचएस उपाध्याय ने भी कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त करने की अपील की है। उन्होंने इस बाबत कर्मचारियों को पत्र भी लिखा है। उनका कहना है कि परीक्षा में देरी या अंकपत्र नहीं बनने की वजह से विद्यार्थियों का हित प्रभावित होगा। उनका कहना है कि इस गतिरोध के बावजूद अध्यापकों और कर्मचारियों को तो समय से वेतन मिल जाएगा लेकिन छात्र-छात्राओं को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसलिए कर्मचारियों पर आंदोलन खत्म कर देना चाहिए।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय अध्यापक संघ (आटा) और संघटक कालेज शिक्षक संघ (आक्टा) की सोमवार को हुई बैठक में लिए गए निर्णय के अंतर्गत शिक्षकों ने कर्मचारियों को पत्र लिखकर हड़ताल वापस लेने की अपील की। छात्रहित में उन्होंने वार्षिक परीक्षा तक आंदोलन खत्म करने की अपील की। हालांकि कर्मचारियाें ने अध्यापकों की अपील को मानने से इंकार कर दिया। कर्मचारियों के बीच पहुंचे अध्यापकों ने अपील की बाबत पत्र सौंपा।

उनका कहना था कि इस तरह के आंदोलनों का अराजक तत्व और अवसरवादी लोग लाभ लेने की फिराक में होते हैं। उन्हें अवसर न दें। अध्यापकों ने यह भी लिखा है कि  मांग मनवाने के लिए हड़ताल, प्रदर्शन उचित माध्यम नहीं है। अध्यापकों की भी मांगें वर्षों से लंबित रहीं लेकिन संघ ने आंदोलन के बजाय न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। शिक्षकों ने अपील की कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि है। इसे देखते हुए कर्मचारी तत्काल हड़ताल वापस लें। यदि परीक्षा की अवधि में विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी मांगें पूरी नहीं की तो शिक्षक वर्ग भी उनके साथ खड़ा होगा। बैठक में अध्यक्ष प्रोफेसर रामसेवक दुबे, महामंत्री प्रोफेसर शिवमोहन प्रसाद, प्रोफेसर लालसा यादव, डॉ.सूर्य नारायण सिंह, संघटक कालेज शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ.सुनील कांत मिश्र, डॉ.एसपी सिंह, डॉ.राजेश गर्ग, डॉ.संतोष श्रीवास्तव आदि शामिल रहे।
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