इलाहाबाद। देश भर में सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) से जुड़े केंद्रीय कर्मियों, पेंशनरों एवं उनके आश्रितों के लिए राहत वाली खबर है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने पिछले साल अगस्त में जारी उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसके तहत सीजीएचएस के लाभार्थियों को दी जाने वाली तमाम महत्वपूर्ण, महंगी एवं ब्रांडेड दवाओं के वितरण पर रोक लगा दी गई थी। पुराना आदेश वापस होने से इलाहाबाद में ही एक लाख से अधिक केेंद्रीय कर्मियों, पेंशनरों एवं उनके आश्रितों को राहत मिलेगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले साल 25 अगस्त को आदेश जारी कर सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) के लाभार्थियों (केंद्रीय कर्मियों, पेंशनरों एवं उनके आश्रितों) को डायबिटीज, किडनी जैसी गंभीर बीमारियों के लिए दी जाने वाली तमाम महत्वपूर्ण, ब्रांडेड एवं महंगी दवाओं के वितरण रोक लगा दी थी। दरअसल, मंत्रालय ने आदेश जारी किया था कि जो दवाएं सीजीएचएस की कोलोनरी में नहीं हैं, उन दवाओं का वितरण नहीं किया जाएगा।
इसकी वजह से तमाम महत्वपूर्ण, महंगी एवं ब्रांडेड दवाओं की सप्लाई रोक दी गई और लाखों मरीजों के सामने मुसीबत खड़ी हो गई। इस बाबत ‘अमर उजाला’ के दो एवं तीन सितंबर के अंक में खबर प्रकाशित की गई तो मामला अपर निदेशक मुख्यालय नई दिल्ली तक पहुंचा। इस पर संज्ञान लेते हुए चार सितंबर को सीजीएचएस प्रशासन ने आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए डायबिटीज की सभी दवाओं पर लगी रोक हटा ली। सीजीएचएस में नियमित रूप से इलाज कराने वालों में 50 फीसदी से अधिक संख्या डायबिटीज रोगियों की है, सो फौरी तौर पर सबसे पहले उन्हें राहत दी गई। साथ ही इस पूरे मामले की समीक्षा के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी का भी गठन कर दिया गया। अब सीजीएचएस से जुड़े सभी लाभार्थियों को राहत मिल गई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 25 अगस्त 2014 को जारी किया गया आदेश वापस ले लिया है। यानी अब किसी भी दवा के वितरण पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा और सीजीएचएस से जुड़े लाभार्थियों को सभी दवाएं मिलेंगी। इस बाबत भारत सरकार के अनु सचिव सुनील कुमार ने आदेश भी जारी कर दिए हैं। सिविल एकाउंट्स ब्रदरहुड के पूर्व अध्यक्ष हरिशंकर तिवारी ने इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे देश भर में लाखों केंद्रीय कर्मियों, पेंशनरों एवं उनके आश्रितों को बड़ी राहत मिलेगी।