कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की ओर से केंद्रीय सुरक्षा बलों में कांस्टेबल (जीडी) की भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। आयोग की ओर से 2011 में कांस्टेबल जीडी के अभ्यर्थियों को कोर्ट के आदेश के बाद वरीयता कॉलम गलत भरने वाले अभ्यर्थियों को एक अवसर दिया गया है। आयोग की ओर से अवसर दिए जाने के बाद मेरिट से बाहर हुए अभ्यर्थियों ने शिकायत की है कि आयोग की ओर से जारी अंतिम मेरिट से कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को बड़ी संख्या में चयनितों की सूची में शामिल कर दिया गया है।
आयोग की ओर से जारी परिणाम पर आपत्ति उठाते हुए परीक्षा में शामिल दूसरे अभ्यर्थियों का कहना है कि एक ही अभ्यर्थी को बार्डर क्षेत्र एवं नक्सल क्षेत्र दोनों आरक्षण दे दिया गया है। उत्तर प्रदेश में नक्सल प्रभावित एवं बार्डर क्षेत्र के जिले अलग-अलग हैं, ऐसे में कोई अभ्यर्थी एक समय में दो जिलों में कैसे निवास कर सकता है। किसी अभ्यर्थी को एक ही आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए, जबकि आयोग ने एक अभ्यर्थी को ओबीसी, नक्सल एवं बार्डर क्षेत्र तीनों का आरक्षण दे दिया है। यूपी में नक्सल प्रभावित जिलों में सोनभद्र, मिर्जापुर एवं चंदौली शामिल हैं जबकि बार्डर क्षेत्र वाले जिलों में बहराइच, बलरामपुर, लखीमपुरखीरी, महराजगंज, पीलीभीत, श्रावस्ती एवं सिद्धार्थनगर शामिल हैं।
चयन से बाहर होने वाले अभ्यर्थियों का आरोप है कि अनारक्षित कोटे में रोलनंबर 3011011435 वाले अभ्यर्थी को परीक्षा में मात्र 60 अंक मिले हैं, जबकि अनारक्षित कोटे की अंतिम मेरिट 63 अंक है। ऐसे में कम अंक पाने वाले इस अभ्यर्थी को सीआईएसएफ में चयन मिल गया है, जिसकी मेरिट 76 अंक है। इसी प्रकार रोलनंबर 3013050115 वाले अभ्यर्थी को नक्सल एवं बार्डर क्षेत्र दोनों के आरक्षण के साथ ओबीसी का आरक्षण दिया गया है। आरोप लगाने वालों ने इस प्रकार कई अभ्यर्थियों का रोलनंबर अमर उजाला को उपलब्ध कराए हैं, जिनमें नियमों का पालन नहीं किया गया है।