हॉस्टल विवाद को लेकर कैमरे पर आए इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के वीसी
- फोटो : SELF
केंद्रीय विज्ञान एवं तकनीकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने शनिवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में व्यवहारिक एवं संज्ञानात्मक विज्ञान केंद्र के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन किया। इसके बाद वह सीनेट हॉल में शिक्षकों एवं छात्रों को संबोधित करने पहुंचे, लेकिन उनके बोलने से पहले ही कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू का मुद्दा उठा दिया गया। इस पर डॉ. हर्षवर्धन ने सुझाव दिया कि ईमानदारी से कर्म करें और ईश्वर पर भरोसा रखें, कोई रास्ता जरूर निकलेगा।
मंच पर उपस्थित चीफ प्रॉक्टर एवं ऑटा अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे ने कहा कि कुलपति ने महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की।
इविवि के भी कुछ विभागों में शिक्षकों की नियुक्ति हुई। इविवि की बेहतरी के लिए उन्होंने ढेरों काम किए लेकिन कुछ बाहरी लोग केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रलय में जाकर शिकायत कर रहे हैं। कुलपति पर मनगढ़ंत आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने डॉ. हर्षवर्धन को संबोधित करते हुए कहा कि आप डॉक्टर हैं और चाहें तो इस मर्ज का इलाज कर सकते हैं। उन्होंने मंत्री से आग्रह किया कि वह प्रधानमंत्री और मानव संसाधन विकास मंत्री को वास्तविकता से अवगत कराएं। कराया जाएगा। प्रो. अनुपम दीक्षित ने भी कहा कि कुलपति ने शिक्षकों की नियुक्ति कर ऐतिहासिक काम किया। ऑटा अध्यक्ष ने कुलपति के समर्थन में डॉ. हर्षवर्धन को ज्ञापन भी सौंपा।
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि वह मानव संसाधन विकास मंत्री नहीं हैं। इसलिए सीधे तौर पर कुछ नहीं कर सकते। सत्य, ईमानदारी और कर्म में बहुत ताकत होती है। सत्य कभी हारता नहीं। सत्य के रास्ते पर चले और ईमानदारी से कर्म करते हुए ईश्वर पर विश्वास रखें। कोई रास्ता जरूर निकलेगा। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि वह अपनी क्षमता के अनुरूप उचित फोरम पर कुलपति का पक्ष रखेंगे। उन्होंने इस बात की सराहना की कि कार्यक्रम में बैठे दर्शक अनुशासित हैं, जो कम देखने को मिलता है। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान प्रो. राजेंद्र सिंह ‘रज्जू भइया’ और डॉ. मुरली मनोहर जोशी का भी जिक्र किया। इस मौके पर कुलपति प्रो. हांगलू ने कहा कि समाज में तमाम ऐसी समस्याएं हैं, जिनका हल शिक्षकों को ही खोजना है। कार्यक्रम का संचालन प्रो. एन. श्रीनिवासन ने किया। प्रो. भूमिका कर भी मंच पर मौजूद रहीं।