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प्रेमिका की शादी होने से दुखी आभूषण कारीगर यमुना में कूदा, मौत

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naini bridge - फोटो : prayagraj
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  • नैनी का था रहने वाला, पुल पर स्कूटी, जेब में मिला सुसाइड नोट

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प्रेमिका की शादी होने से दुखी आभूषण कारीगर राजू उर्फ रज्जू निषाद (30) ने यमुना में कूदकर जान दे दी। सुबह नए यमुना पुल पर पहुंचकर उसने नदी में छलांग लगा दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने गोताखोरों को नदी में उतारा, जिन्होंने करीब घंटे बाद उसे नदी से बाहर निकाल लिया। लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस को उसकी जेब से सुसाइड नोट मिला है। जिसमें उसने युवती की शादी कहीं अन्य होने से दुखी होकर जान देने की बात लिखी है।


राजू उर्फ रज्जू पुत्र किशन निषाद नैनी के टीसीआई, मड़ौका का रहने वाला था और वह गहने बनाने का काम करता था। महेवा में वह आकांक्षा ज्वैलर्स नाम से दुकान भी चलाता था। बृहस्पतिवार सुबह 11 बजे के करीब वह स्कूटी से नए यमुना पुल पर पहुंचा। स्कूटी पुल पर ही छोड़कर वह कुछ देर इधर उधर टहलता रहा और फिर अचानक रेलिंग पर चढ़कर यमुना में छलांग लगा दी। राहगीरों ने सूचना दी तो पुलिस पहुंच गई और फिर गोताखोरोें को बुलाकर नदी में उतारा गया। करीब एक घंटे बाद गोताखोर उसे निकालकर बाहर लाए लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जांच पड़ताल में उसकी जेब से सुसाइड नोट मिला, जिसमें मिले नंबर के आधार पर सूचना दी गई तो परिजन आ गए। भाई मनोज ने बताया कि राजू भोर में पांच बजे स्कूटी लेकर दोस्त के घर जाने की बात कहकर घर से निकला था।
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पोस्टमार्टम के बाद दोपहर में परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार दारागंज घाट पर किया। चार भाई बहनों में दूसरे नंबर के राजू की मौत से परिवार मेें कोहराम रहा। कीडगंज इंस्पेक्टर रोशनलाल ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
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मेरे मरने के बाद अपनी दुनिया में खुश रहना...
राजू की जेेब से पुलिस को तीन पन्नों का सुसाइड नोट मिला है। इसमें लिखा है, कि वह भाई के ससुरालपक्ष की युवती से प्यार करता था। वह भी उसे बहुत चाहती थी। लेकिन राजी न होने के बावजूद घरवालों ने युवती की शादी कहीं और कर दी। युवती के लिए उसने लिखा है, मेरे मरने के बाद अपनी दुनिया मेें खुश रहना। इसके अलावा अपने घरवालों को परेशान न किए जाने के साथ ही उसने यह भी लिखा है कि ‘मेरे मरने के बाद दुकान मेरी बहन के नाम कर देना। अपनी मां के लिए उसने लिखा है कि ‘मां, मुझे माफ करना। मेरे भाग्य में तुमको सुख देना नहीं लिखा था।’

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