प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस), जनवादी लेखक संघ (जलेस), जन संस्कृति मंच जनसंस्कृति (जसम) व अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के संयुक्त तत्वावधान में कवि-पत्रकार पंकज सिंह की स्मृति में सभा आयोजित की गई। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र में हई सभा में समकालीन जनमत के संपादक रायजी राय ने कहा कि पंकज सिंह की कविताओं की प्राणवायु नक्सलबाड़ी की प्रेरणा है। उन्हें कोरी भावुकता से नहीं टकराहटों से समझा जा सकता है। वह एक असमाप्त युद्ध के योद्धा कवि हैं।
पंकज सिंह की पत्नी और कवयित्री सविता सिंह ने कहा कि क्रांति और भाषा उनका पैशन था। वह रुढ़िवादी कम्युनिस्ट नहीं थे। उनमें सिद्धांत और कर्म की एकता थी। जन संस्कृति मंच के महासचिव प्रणय कृष्ण ने उन्हें आंदोलन के आवेग का कवि बताया। वे वाम क्रांतिकारी धारा के सर्वाधिक महत्वपूर्ण कवियों में से एक हैं। जनवादी लेखक संघ के हरीश पांडेय ने उन्हें बेहद सजग कवि बताया। वह समय की जटिलता को पहचाने वाले कवि थे। आशीष मित्तल ने पंकज सिंह को साम्राज्यवाद और सामंतवाद के विरुद्ध संघर्षरत जनता का मित्र कवि बताते हुए उनकी विभिन्न भूमिकाओं को याद किया।
इससे पूर्व प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष प्रो. संतोष भदौरिया ने पंकज सिंह के व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों का परिचय देते हुए उनकी कविता ‘मध्य रात्रि’ में और ‘साम्राज्ञी आ रही है’ का पाठ किया। सभा का संचालन केके पांडेय ने किया। इस दौरान डॉ. राम प्यारे राय, कुमुदिनी पति, हिमांशु रंजन, असरार गांधी, डॉ. लालसा यादव, डॉ. अमरेंद्र शर्मा, डॉ. रामपाल गंगवार, अनिल रंजन भौमिक, डॉ. अनीता गोपेश, प्रवीण शेखर, प्रो. विवेक तिवारी आदि रहे।