हाईकोर्ट ने कहा है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधिकारी प्रबंधन कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को निलंबित करने का आदेश नहीं दे सकते हैं, क्योंकि 1921 के एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। यह कमेटी ऑफ मैनेजमेंट को अधिकार है कि वह दोषी प्रधानाचार्यों को निलंबित करे। कोर्ट ने आगरा और अलीगढ़ के कुछ कॉलेजों की प्रबंध समिति से कहा है कि वह जिला विद्यालय निरीक्षकों की संस्तुति पर उचित जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई कर सकते हैं। कोर्ट ने की गई कार्रवाई में हस्तक्षेप से इंकार कर दिया।
योगेश कुमार और दो अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने सुनवाई की। दोनों जिलों के कुछ कॉलेजों ने बोर्ड परीक्षा में कुछ अयोग्य अभ्यर्थियों को शामिल कर लिया था, इससे संबंधित जांच रिपोर्ट सामने आने पर सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद ने आगरा और अलीगढ़ के जिला विद्यालय निरीक्षकों को दोषी प्रधानाचार्यों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। निरीक्षकों ने संबंधित प्रबंधन को प्रधानाचार्यों को निलंबित करने का आदेश दिया। इसी आदेश को याचिका दाखिल कर चुनौती दी गई थी।
वहीं, याची प्रधानाचार्यों का कहना था कि उनकी भूमिका सिर्फ प्रवेश पत्र जारी करने की है। गलत लोगों को बोर्ड परीक्षा में शामिल करने के दोषी यूपी बोर्ड के कर्मचारी हैं। कोर्ट के पूछने पर यूपी बोर्ड की ओर से बताया गया कि दोषी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही अयोग्य अभ्यर्थियों को शामिल करने वाले संस्थानों को 10 वर्ष के लिए ब्लैक लिस्ट किया जा रहा है। प्रबंध समितियों को भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।