अगर आप पीवीआर सिनेमाज में कोई फिल्म देखने जाएं तो देखेंगे कि राष्ट्रधुन बजते ही लोग खड़े हो जाते हैं। धुन के खत्म होते ही अचानक आपको यह पता चलता है कि यह बजाज का विज्ञापन है। दरअसल बजाज ने आईएनएस विक्रांत जहाज के कबाड़ को खरीद लिया है और उसके लोहे को अपनी बाइक्स में प्रयोग कर रहा है, यानी राष्ट्रधुन का सहारा लेकर बजाज अपनी बाइक्स का प्रचार कर रहा है। सैकड़ों दर्शक अपने का ठगा सा महसूस करते हैं।
पीवीआर में हर शो की शुरुआत में चल रहे बजाज के इस विज्ञापन से दर्शकों में खासा नाराजगी है। वे इसे राष्ट्रधुन के प्र्रति भावना से खिलवाड़ मान रहे हैं। उनका मानना है कि राष्ट्र धुन के सम्मान में खड़ा होना तो सही है लेकिन राष्ट्रधुन को विज्ञापन का हिस्सा बनाना गलत है। विज्ञापन दिखाने के लिए दर्शकों को खड़ा कर दिया जाता है। विज्ञापन के माध्यम से बजाज यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि आईएनएन विक्रांत के लोहे का लहू बजाज की बाइक्स में दौड़ रहा है। लोगों का कहना है कि यह तो सीधे तौर पर दर्शकों की राष्ट्रभावना को कैश कराकर अपने उत्पाद के प्रति उन्हें आकर्षित करना है।
पीवार सिनेमाज के मैनेजर पल्लव हजारिका का कहना है कि शो में कौन से विज्ञापन चलेगा और कौन सा नहीं इसका निर्णय स्थानीय स्तर पर नहीं होता है। इस विज्ञापन को लेकर अब तक किसी दर्शक ने शिकायत नहीं की है। अगर इस बारे में शिकायत पहुंचेगी तो निश्चित रूप से हाई अथारिटी को इस संबंध में सूचित ेकिया जाएगा। वरिष्ठ कर निरीक्षक अरविंद वर्मा का कहना है कि फिल्मों के साथ कुछ विज्ञापन सेंसर बोर्ड से ही जुड़ कर आते हैं। बजाज का विज्ञापन फिल्म के साथ ही जुड़कर आया है या फिर इसे अलग से जोड़ा गया है, इसकी जांच कराई जाएगी।
वहीं विधि विशेषज्ञों का भी मानना है कि राष्ट्रीय धुन से लेकर किसी भी राष्ट्रीय प्रतीक के प्रति यथोचित सम्मान जरूरी है। यदि किसी भी प्रकार से इसे लेकर राष्ट्रीय भावना आहत होती है तो यह निश्चित रूप से गंभीर मुद्दा है। उचित फोरम से इस मुद्दे की जांच कराई जानी चाहिए और राष्ट्रीय भावना के आहत होने या राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति किसी भी तरह की अवमानना की बात आती है तो भारतीय संविधान के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।