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उमेश पाल हत्याकांड : महज छह सेकंड की देर होती तो तीन नहीं चार लोगों की जाती जान, नया सीसीटीवी फुटेज आया सामने

Sun, 19 Mar 2023 10:30 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

प्रदेशभर को हिलाकर रख देने वाले उमेश पाल हत्याकांड में एक और खुलासा हुआ है। यह बात सामने आई है कि अगर 6 सेकंड की देरी हुई होती तो इस जघन्य वारदात में एक और निर्दोष की जान चली जाती।
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Prayagraj News : उमेश पाल हत्याकांड का नया सीसीटीवी फुटेज आया सामने। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेशभर को हिलाकर रख देने वाले उमेश पाल हत्याकांड में एक और खुलासा हुआ है। यह बात सामने आई है कि अगर 6 सेकंड की देरी हुई होती तो इस जघन्य वारदात में एक और निर्दोष की जान चली जाती। वह कोई और नहीं बल्कि उमेश पाल की रिश्तेदार किशोरी है, जो बम से हुए हमले में बाल-बाल बची थी। घटना के 24 दिन बाद सामने आए एक और सीसीटीवी फुटेज से इसका खुलासा हुआ है।

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58 सेकंड के सीसीटीवी फुटेज को देखने से पता चलता है कि बम गोलियों से हमले के दौरान उमेश पाल की रिश्तेदार किशोरी बाल बाल बची थी। फुटेज के मुताबिक 24 फरवरी को शाम 4:56 मिनट पर यह वारदात अंजाम दी गई। वीडियो फुटेज की शुरुआत 4:56:44 सेकंड पर होती है जिसमें उमेश पाल की रिश्तेदार किशोरी घर के भीतर भागते नजर आती है। ठीक 6 सेकंड बाद यानी 4:56:50 सेकंड पर वीडियो में उमेश पाल का गनर राघवेंद्र दिखाई देता है जो भागते हुए घर के भीतर आता है।

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वह घर के भीतर घुस पाता, इसके पहले ही 51 वें सेकंड में पीछे से बम से हमला किया जाता है और राघवेंद्र खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर जाता है। इसके बाद चारों ओर धुआं फैल जाता है और फिर कुछ नजर नहीं आता। 5 सेकंड बाद 4:56:56 सेकेंड पर धुआं छटता है तो राघवेंद्र जमीन पर पड़ा तड़पता नजर आता है। इसी दौरान उमेश के घर के अगल-बगल रहने वाले कुछ लोग निकलते हैं और फिर घायल राघवेंद्र को उठाकर कमरे के भीतर ले जाते हैं।

सीधे लगा होता बम तो उड़ जाते चीथड़े

सीसीटीवी फुटेज से एक बात और सामने आई है कि उमेश पाल के गनर राघवेंद्र को बम सीधे नहीं लगा वरना उसके चीथड़े उड़ जाते। गली में घुसकर गुलाम और असद के उमेश पाल को गोलियों से भूनने के बाद गुड्डू मुस्लिम ने घर के भीतर भाग रहे राघवेंद्र को निशाना बनाकर बम से हमला किया। लेकिन यह बम सीधे राघवेंद्र को ना लगकर गली की दाहिनी ओर स्थित दीवार पर लगा था।इसके बाद बम से निकले छर्रे व अन्य अवशेष लगने से राघवेंद्र के दाहिने कंधे पर गंभीर चोट आई और वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिरकर तड़पने लगा। जानकारों का कहना है कि दीवार पर बम लगने के बावजूद राघवेंद्र इस कदर गंभीर रूप से घायल हुआ कि इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इससे साफ है कि बम बेहद शक्तिशाली था। यह भी कहा जा रहा है कि बम अगर सीधे राघवेंद्र को लगा होता तो उसके चीथड़े उड़ जाते।

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पुलिस की अनदेखी पढ़ रही भारी, धड़ल्ले से बिक रहा मौत का सामान

उमेश पाल हत्याकांड कोई पहली वारदात नहीं, जिसमे बम का इस्तेमाल किया गया। जिले में लगातार ऐसी वारदातें सामने आ रही हैं जिसमें हमले या दहशत फैलाने के लिए बम का इस्तेमाल किया गया। फिर चाहे वह सिविल लाइंस स्थित नामी स्कूलों में हुई घटनाएं हो या दारागंज में बड़े हनुमान मंदिर के पास छात्र गुटों में हुए विवाद के बाद हुई हमले की वारदात रही हो।

इतना ही नहीं बेखौफ बदमाश कोतवाली से चंद कदम की दूरी पर स्थित एक दुकान पर भी दिनदहाड़े बमबाजी की वारदात को अंजाम दे चुके हैं। बमबाजी की लगातार वारदातों से कई बार यह सवाल उठा कि आखिर बम बांधने का सामान इतनी आसानी से कैसे उपलब्ध हो पा रहा है। इसके बावजूद जिला पुलिस के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस ने घटनाओं में शामिल लोगों को तो गिरफ्तार कर जेल भेज दिया लेकिन उनसे यह राज नहीं उगलवा सकी कि आखिर बम बांधने का सामान उन्हें कहां से और किसने उपलब्ध कराया। यही वजह है कि लगातार बमबाजी की और वारदातें हो रही हैं और पुलिस इन पर लगाम लगा पाने में नाकाम है।

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