अशरफ ने अर्जी दाखिल कर की सुरक्षा की मांग
प्रयागराज। जिला न्यायालय की विशेष अदालत एमपीएमएलए में चल रही उमेश पाल अपहरण मामले की सुनवाई में अतीक का भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ ने अर्जी दाखिल सुरक्षा की मांग की है। इसके पूर्व अपहरण कांड की सुनवाई होनी थी लेकिन जिला अधिवक्ता संघ के न्यायिक कार्य से विरत रहने की वजह से मंगलवार को होने वाली सुनवाई टालदी गई। अब यह सुनवाई बुधवार को भी होगी।
अशरफ की अर्जी को अधिवक्ता विजय मिश्रा केजरिए दाखिल की गई। कहा गया है कि अपहरण मामले में पेशी टेली कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनिश्चित कराई जाए। इसके अलावा अगर जेल स्थानांतरण के दौरान बरेली कारागार से अन्यंत्र किसी जेल में ले जाया जाए तो उचित सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराई जाए। इसके साथ ही उनके छह अधिवक्ताओं को भी साथ रखा जाए। इसकी वीडियोग्राफी कराई जाए। अदालत ने इस अर्जी पर भी एक मार्च को सुनवाई की तिथि सुनिश्चित की है।
अतीक की पत्नी शाइस्ता फरार, तलाश में दबिश
उमेश पाल हत्याकांड में नामजद अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में दबिश दे रही है। चकिया में वह अपनी जिस बहन के घर रहती हैं, वहां से वह घटना के दूसरे दिन ही निकल गईं थीं। उसके पास से शाइस्ता का कुछ पता नहीं है। इस मामले में अफसरों का कहना है कि नामजद सभी लोगों की तलाश की जा रही है। शाइस्ता भी उनमें से एक हैं।
धूमनगंज में जिस दिन शूटआउट को अंजाम दिया गया था, उस दिन शाइस्ता परवीन ने अपने दोनों छोटे बेटों के साथ प्रेस कांफ्रेंस की थी। घटना के बाद भी उन्होंने मीडिया वालों को बयान जारी कर कहा था कि इस कांड में न तो उनका न ही उनके परिवार के किसी का हाथ है। शहर में जो भी घटना होती है, उसमें जबरन नाम जोड़ दिया जाता है। घटना वाली रात जया पाल की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई जिसमें अतीक के साथ साथ अशरफ, पत्नी शाइस्ता परवीन और बेटों को नामजद किया गया था।
इसी के बाद शाइस्ता घर से फरार हो गईं। वह कहां हैं, किसी को नहीं मालूम। पुलिस ने उनकी तलाश में कई बार घर पर दबिश दी लेकिन उनके बारे में कोई बता नहीं पाया। उनका मोबाइल भी बंद है। इस बीच शाइस्ता ने मुख्यमंत्री को चिट्ठी भेजी और सीजेएम कोर्ट में अर्जी भी दाखिल की लेकिन अपने वकील के माध्यम से। शाइस्ता कहां है, इस बारे में किसी को भी कुछ नहीं पता है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि वह शहर मेें ही है लेकिन उन्हें डर है कि पुलिस हत्याकांड में पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। वह जल्द हीअपने वकीलों के माध्यम से हाईकोर्ट में राहत की याचिका दाखिल कर सकती हैं।