कुछ दिनों बाद अतीक को पता चला कि उमेश ने शाइस्ता परवीन के बारे में भी कमेंट किया था। इतना सुनने के बाद वह बौखला गया और इसके बाद ही उसने उमेश पाल हत्याकांड की पटकथा लिखी। साबरमती जेल से अपने भाई बरेली जेल में बंद अशरफ से फेसटाइम एप से बातचीत की और कहा कि उमेश को खत्म करना है। उसने उसे पूरी बात भी बताई।
इसके बाद अशरफ ने असद के जरिए गुलाम, गुड्डू मुस्लिम, साबिर, विजय चौधरी उर्फ उस्मान, अरमान व सदाकत को बरेली जेल बुलाया और साजिश रची। सूत्रों का कहना है कि प्लानिंग के तहत असद को वारदात के दौरान कार से बाहर नहीं निकलना था, लेकिन वह उमेश से खुन्नस रखने लगा था। यही वजह थी कि वारदात के वक्त वह अपना आपा खो बैठा और उसने कार से बाहर उतरकर उमेश पर गोलियां बरसानी शुरू कर दी।