सरकार की ओर से किया गया था जमानत का विरोध
अतीक के वकील विजय पर उमेश पाल हत्याकांड में मुखबिरी करने का आरोप है। विजय की गिरफ्तारी लखनऊ से हुई थी। जमानत पर रिहाई की मांग करते हुए उनकी अधिवक्ता मंजू सिंह ने दलील कि उन्हें अतीक के वकील होने के कारण फंसाया जा रहा हैं। इसी तरह कैश व नियाज की ओर से भी बेगुनाह होने की दलीलें दी गई। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि कैश ड्राइवर था, जबकि काफी समय पहले से नौकरी छोड़ चुका था। कोई अपराधिक इतिहास नहीं है। नियाज़ के वकील ने भी उसे बेकसूर बताया। कहा कि उसका घटना से कोई सरोकार नहीं है। उसके पास से की बरामदगी नहीं है, न ही वह एफआईआर में नामजद है।
लंबी बहस में दौरान उमेश पाल की पत्नी जया पाल के अधिवक्त प्रवीण पांडे, सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने जमानत पर रिहाई का विरोध किया। कहा कि सभी आरोपी हत्याकांड में सक्रिय रूप से शामिल रहे है। अभी तक ट्रायल कोर्ट में आरोप निर्मित होने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। मौजूदा समय में अतीक की इनामी बीवी शाइस्ता परवीन, अशरफ की बीवी जैनब व बमबाज गुड्डू मुस्लिम समेत कुल सात अन्य आरोपी फरार हैं। ऐसे में उनकी रिहाई से लंबित ट्रायल प्रभावित होगा।
24 फरवरी 2023 की है घटना
प्रयागराज के धूमनगंज इलाके में 24 फरवरी 2023 को बसपा विधायक रहे राजू पाल हत्याकांड के आखिरी गवाह उमेश पाल की हत्या कर दी गई थी। इस हमले में उनके गनर की भी मौत हो गई। हत्या के बाद उमेश पाल की पत्नी जया पाल ने हत्या के आरोप अतीक के भाई अशरफ दोनों बेटों व पत्नी शाइस्ता परवीन पर लगाया था।