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Umesh Pal Hatyakand : माफिया अतीक ने नई उम्र के लड़कों से करा डाली प्रदेश की सबसे बड़ी वारदात

Tue, 07 Mar 2023 05:23 AM IST
विनोद सिंह त्रिलोकी यादव, प्रयागराज

सार

उमेश पाल हत्याकांड को बेहद सुनियोजित तरीके से महीनों के षड्यंत्र के बाद अंजाम दिया गया था। अतीक ने अपने पुराने शूटर गुड्डू मुस्लिम और गुलाम को छोड़कर सभी शूटर नई उम्र के लड़कों को चुना। गुड्डू मुस्लिम की उम्र लगभग 52 वर्ष है तो गुलाम की उम्र 40 है।
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Prayagraj News : माफिया अतीक अहमद और उमेश पाल। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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प्रदेश में अपराध की सबसे बड़ी वारदातों में से एक उमेश पाल हत्याकांड को 20 से 25 साल की उम्र के नए लड़कों ने अंजाम दिया। गुड्डू मुस्लिम और गुलाम को छोड़कर सभी कम उम्र के हैं। ज्यादातर लड़कों की यही पहली आपराधिक वारदात थी।

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इस कांड के लिए सिर्फ उन्हें ही चुना गया था जो दिलेर थे। उन्हें उमेश पाल की हत्या के साथ साथ अतीक के नाम का खौफ भी पैदा करना था, इसलिए किसी ने भी चेहरा नहीं ढका था। पुलिस का कहना है कि हत्याकांड में शामिल शूटरों के आपराधिक रिकार्ड पता किए जा रहे हैं।

उमेश पाल हत्याकांड को बेहद सुनियोजित तरीके से महीनों के षड्यंत्र के बाद अंजाम दिया गया था। अतीक ने अपने पुराने शूटर गुड्डू मुस्लिम और गुलाम को छोड़कर सभी शूटर नई उम्र के लड़कों को चुना। गुड्डू मुस्लिम की उम्र लगभग 52 वर्ष है तो गुलाम की उम्र 40 है। दोनों शातिर अपराधी हैं। उनके खिलाफ कई मुकदमें दर्ज हैं। गुड्डू तो अंतरप्रांतीय अपराधी है। हालांकि जिन नए लड़कों को चुना गया था। उनमें सबसे पहला नाम अतीक का बेटा असद है। उसकी उम्र महज 19-20 साल के बीच है।

असद के नाम कोई मुकदमा दर्ज नहीं है। असद को अतीक के घर में सबसे बड़ा दिलेर और सबसे बड़ा गुस्सैल कहा जाता था। हथियार चलाने में भी वह माहिर है। पिछले सोमवार को क्रेटा गाड़ी से चालक अरबाज का एनकाउंटर किया गया। अरबाज की उम्र भी लगभग 24 साल की थी। पुलिस ने एनकाउंटर के बाद कहा था कि उसके आपराधिक रिकार्ड के बारे में पता किया जा रहा है। आज विजय का एनकाउंटर हुआ। उसकी उम्र भी महज 22 साल की थी।
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मरियाडीह के साबिर और अरमान की उम्र लगभग 25 साल है। इस मामले की जांच कर रहे एक अधिकारी ने बताया कि अतीक ने इस वारदात के लिए दिलेर नए लड़कों को चुना था जो बिना किसी डर और दहशत के एक ऐसे आदमी को मार दें, जिसके साथ कार्बाइन के साथ दो सिपाही सुरक्षा में लगे थे। नई उम्र के इन लड़कों ने यह काम करने का बीड़ा उठाया। गुलाम और गुड्डू मुस्लिम को इसलिए साथ रखा गया कि कहीं कोई गड़बड़ हो जाए तो दोनों अपने अनुभवों से स्थिति को संभाल लें।
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