सौलत की तरह बी श्रेणी का हिस्ट्रीशीटर, आजीवन नहीं होगी बंद
उमेश को खान सौलत हनीफ की ही तरह ‘बी’ श्रेणी का हिस्ट्रीशीटर बनाया गया है और उसका हिस्ट्रीशीट नंबर 22-बी है। यह आजीवन बंद नहीं हो सकेगी। अन्य हिस्ट्रीशीटरों की तरह ही अब उसकी कड़ी निगरानी की जाएगी। जेल से छूटने के बाद भी वह लगातार पुलिस की नजर में रहेगा। हिस्ट्रीशीट खुलने के बाद अब जमानत मिलने की स्थिति में भी वह पुलिस से बच नहीं सकेगा। उसे संबंधित थाने में जाकर हाजिरी देनी होगी और ऐसा नहीं करने पर पुलिस उसके घर पर भी जा सकती है।
हत्याकांड का छठवां आरोपी, जिसकी हिस्ट्रीशीट खुली
विजय मिश्रा हिस्ट्रीशीटर घोषित किया जाने वाला उमेश पाल हत्याकांड का छठा आरोपी है। इससे पहले अतीक के बेटों उमर-अली,अशरफ के सालों जैद मास्टर व सद्दाम के अलावा खान सौलत हनीफ की हिस्ट्रीशीट खोली जा चुकी है। लखनऊ जेल में बंद उमर व नैनी जेल में निरुद्ध अली की हिस्ट्रीशीट 15 अप्रैल को खोली गई थी। उमर की हिस्ट्रीशीट नंबर 57-बी और अली की हिस्ट्रीशीट नंबर 48-बी है।
कुल नौ मुकदमों में आराेपी
- मूल रूप से ककरा कोटवा सरायइनायत का रहने वाला विजय मिश्रा कुल नौ मुकदमों में आरोपी है।
- उस पर गैंगस्टर भी लग चुका है। वर्तमान में उसका घर म्योराबाद में है।
- 2003 में झूंसी में उसके खिलाफ बलवा, मारपीट समेत अन्य धाराओं में पहला केस दर्ज हुआ।
- एक साल बाद मारपीट में ही झूंसी में दूसरा केस दर्ज हुआ।
- 2010 में मुट्ठीगंज थाने में तीन केस दर्ज हुए। यह लूट, अवैध शस्त्र रखने व गैंगस्टर के मुकदमे थे।
- 2017 में करेली थाने में धोखाधड़ी का केस लिखा गया।
- पिछले साल उमेश पाल हत्याकांड के साथ ही अतरसुइया में टिंबर व्यापारी से तीन करोड़ की रंगदारी मांगने के आरोप में केस दर्ज किया गया था।