गंगाजल अशुद्ध होता तो महाकुंभ में लोग होते बीमार
उमा भारती ने कहा कि गंगा स्नान करते समय हम पानी पी ही लेते हैं, लेकिन हमें कोई बीमारी नहीं होती है। महाकुंभ में करोड़ों लोगों ने डुबकी लगाई लेकिन कोई बीमार नहीं पड़ा। इसका मतलब है कि गंगा जल शुद्ध है। उन्होंने आह्वान किया कि अपने पूर्वजों का तर्पण करने के लिए जाने वाले लोग पहले एक लोटा गंगा का पानी पीएं उसके बाद ही तर्पण करें। आए दिन देखा जाता है कि आचमन के लिए लोग मिनरल वाटर ले जाते हैं लेकिन जिसका तर्पण करते हैं अपने पूर्वजों को गंगा जल की पीने के लिए चढ़ाते हैं। यह गलत है। पहले खुद पानी पीएं तभी पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
अखिलेश यादव परिवारवादी
स्वदेशी उत्पादों को चूरन बताने के सवाल उठाने पर उमा भारती ने कहा कि अखिलेश परिवारवादी हैं। उनके समझ में स्वदेशी नहीं आएगा। स्वदेशी उनको चूरन ही समझ में आएगा। क्योंकि जिस दिन लोग स्वदेशी अपना लेंगे तो उनका वर्चस्व ही खत्म हो जाएगा। कहा कि समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया भी स्वदेशी के पक्षधर थे, तो इसका मतलब लोहिया भी चूरन देते थे। ऐसा बोलकर अखिलेश अपने बाप-दादों का अपमान कर रहे हैं और अपनी पार्टी के ही सिद्धांतों को नकार रहे हैं। भारत के सभी दलों ने डब्ल्यूटीओ की मुहिम के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ी थी। कहा कि मैं अखिलेश के चूरन वाले बयान की निंदा करती हैं। वह क्या बोल रहे हैं उनको खुद भी नहीं पता है। योगी के सवाल पर कहा कि योगी के मुख्यमंत्री बनने पर काफी खुशी हुई। योगी लौह पुरुष हैं।
भाजपा में 75 साल का कोई नियम नहीं
उमा भारती ने कहा कि भाजपा में 75 साल पर रिटायरमेंट का कोई नियम नहीं है। यह मीडिया के द्वारा गढ़ा गया शब्द है। मोदी ने कभी 75 साल पर रिटायर होने का नाम नहीं लिया है। कई नेताओं के 75 साल पूरे होने के बाद राजनीति से अपने को अलग करने के कारण मीडिया ने 75 साल पर रिटायरमेंट की बात शुरू कर दी। नेपाल में इतना बड़ा आंदोलन जेन जी नौजवानों ने चलाया लेकिन पीएम वृद्ध नेत्री सुशील कार्की को बनाया। इससे पता चलता है कि युवा क्या चाहता है और क्या सोचता है। अमरेकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में कहा कि वह मसखरा (कॉमेडियन) हैं। 70-80 के दशक में जब मैं अमेरिका गई थी तो ट्रंप उस समय टेलीविजन पर मसखरा करते थे। मुझे नहीं पता था कि यह आदमी कभी देश का राष्ट्रपति भी बन सकता है। वह क्या बोल दें कोई भरोसा नहीं। कहा कि राहुल गांधी और ट्रंप में कोई विशेष अंतर नहीं है। ट्रंप कम से कम राजनीति में सफल हो गए और वह राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठ गए लेकिन राहुल गांधी तो मोदी के कारण भटक रहे हैं।