इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के संघटक महाविद्यालयों में शिक्षक भर्ती में धांधली की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। तमाम शिकायतें सीधे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को ईमेल और डाक के माध्यम से भेजी गई हैं। इनमें से चार शिकायतों का संज्ञान लेते हुए यूजीसी की ओर से इविवि के रजिस्ट्रार को पत्र जारी किया गया है और कहा गया है कि मामले में उचित कार्रवाई करते हुए शिकायतकर्ताओं को जवाब दें और यूजीसी को भी इससे अवगत कराएं।
इससे पहले भी संघटक कॉलेजों में शिक्षक भर्ती में धांधली की शिकायतों पर यूजीसी ने इविवि प्रशासन को पत्र भेजकर जवाब मांगा था। इस बार चार मामलों में यूजीसी की ओर से पत्र जारी किया गया है। अली हुसैन रिजवी ने सीएमपी महाविद्यालय और एसएस खन्ना महिला महाविद्यालय में शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार की शिकायत यूजीसी में की है। रमा गुप्ता ने भी विश्वविद्यालय के संघटक कॉलेजों में शिक्षक भर्ती के लिए हुए इंटरव्यू में धांधली का आरोप लगाते हुए यूजीसी के चेयरमैन को शिकायत भेजी है। इसके अलावा छात्र वेद प्रकाश सिंह ने इविवि के सेंटर फॉर डेलवपमेंट स्टडीज में क्रेट-2017 की परीक्षा के लेवल-2 (डीपीसी-साक्षात्कार) में हुए अनियमितता की शिकायत चेयरमैन से की है।
वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने इविवि के संघटक महाविद्यालयों शिक्षक भर्ती में भारी धांधली और नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां किए जाने का आरोप लगाते हुए चेयरमैन से शिकायत की है। इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए यूजीसी की ओर से इविवि प्रशासन को पत्र लिखकर कहा गया है कि इन मामलों में अतिशीघ्र कार्रवाई करते हुए शिकायतकर्ताओं को जवाब दिया जाए और यूजीसी को भी अवगत कराया जाए।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) ने शिक्षाशास्त्र और बिहेविरल एंड कॉग्नेटिव सांइस में शिक्षक भर्ती के लिए इंटरव्यू की तिथि घोषित कर दी है। शिक्षाशास्त्र में शिक्षक भर्ती के लिए इंटरव्यू 20 से 23 जुलाई और बिहेविरल एंड कॉग्नेटिव साइंस में शिक्षक भर्ती के लिए इंटरव्यू 24 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। हालांकि शिक्षाशास्त्र के इंटरव्यू से पहले ही विवाद शुरू हो गया है। इस विषय में शिक्षक भर्ती के लिए सुहासिनी बाजपेयी ने भी आवेदन किया था लेकिन उनके एपीआई के अंक दिखाकर इविवि ने उन्हें इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया। सुहासिनी वही हैं, जिनकी पीसीएस-2015 की मुख्य परीक्षा में कॉपी बदल गई थी। बाद में सुहासिनी ने आपत्ति दर्ज कराई थी और गड़बड़ी सामने आ गई थी। यूपीपीएससी ने अपनी गलती सुधारते हुए उन्हें मुख्य परीक्षा में सफल घोषित किया था। सुहासिनी इन दिनों वर्धा, विश्वविद्यालय महाराष्ट्र में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं। सुहासिनी ने इविवि के एफआरसी निदेशक को मेल भेजकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही कुलपति को भी मेल भेजकर शिकायत दर्ज कराए ंगी।सुहासिनी का दावा है कि इंटरव्यू के लिए जिन 176 अभ्यर्थियों को बुलाया गया है, उनमें से कई अभ्यर्थियों को वह जानती हैं और वह उनसे अधिक योग्य हैं। इसके बावजूद एपीआई में उनके अंक घटाकर इंटरव्यू से पहले ही बाहर कर दिया गया।