अवैध कब्जे को लेकर हुए विवाद में जेल में बंद दो महिलाओं की जमानत मंजूर करते हुए जिला अदालत ने रिहा करने का आदेश दिया है। प्रार्थनापत्रों पर जिला न्यायालय ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की। अभियोजन और जेल में बंद महिलाओं को सुनने के बाद कोर्ट ने दोनों को जमानत मंजूर कर ली है और उन्हें व्यक्तिगत मुचलका दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दिया है। न्यायालय खुलने पर उन्हें जमानत दाखिल करनी होगी। यह आदेश अपर जिला जज वीरभद्र ने जिला शासकीय अधिवक्ता गुलाबचंद अग्रहरी को सुनने के बाद दिया है।
बचाव में जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए आरोपित मीना देवी और उसकी बेटी लकी सोनकर ने अपना पक्ष खुद रखा। घटना 12 नवंबर 2018 थाना जार्जटाउन के सैदपुर मोहल्ले की है। वादी सत्य प्रकाश सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपनी फैक्ट्री में बैठा था कि अभियुक्त उत्तम गौतम, अनिल सोनकर, सरिता गौतम, मीना देवी और लकी सोनकर आदि आए और परिसर में अवैध कब्जे को लेकर विवाद करने लगे। अनिल ने तमंचे से फायर किया, जिससे वादी बच गया। इसके बाद उसे सिर पर प्रहार कर चोटें पहुंचाई गईं। गिर जाने पर उसकी जेब से एक लाख 50 हजार रुपये लूट लिए जाने का आरोप है। जिला न्यायालय सरिता गौतम, अनिल सोनकर, उत्तम कुमार की जमानत पहले ही मंजूर कर चुकी है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता आजाद सोनकर ने हाईकोर्ट में अर्जी देकर जमानत की सुनवाई का अनुरोध किया था, जिस पर जिला जज के निर्देश पर अपर जिला जज ने जिला न्यायालय परिसर स्थित वीडियो कांफ्रेंसिंग हॉल से प्रकरण की सुनवाई की। जमानत की सुनवाई के दौरान डीजीसी फौजदारी ने जमानत का विरोध किया। कोर्ट ने जमानत का आधार पाते हुए दोनों महिला अभियुक्तों की जमानत मंजूर कर ली है।