पुलिस के अनुसार गिरोह का मुख्य आरोपी शशि प्रकाश राय आईटी एक्सपर्ट है जबकि उसका ममेरा भाई मनीष कुमार बारवीं पास है। दोनों ने अब तक सात हजार से अधिक फर्जी मार्कशीट और डिग्री तैयार कर उत्तर प्रदेश के अलावा कई अन्य प्रदेश के लोगों को बेची है। पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में फर्जी सामग्री बरामद की है। इसमें 217 फर्जी अंकपत्र, 42 विश्वविद्यालयों की नकली मोहर, 1000 होलोग्राम, 10 मोबाइल फोन, कंप्यूटर सेट, प्रिंटर और अन्य उपकरण शामिल हैं।
माध्यमिक शिक्षा परिषद की तैयार की थी फर्जी वेबसाइट
पुलिस ने बताया कि पकड़े गए आरोपी [www.upmsp.edu.in] और (http://www.upmsp-edu.in) एक जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट तैयार कर लोगों को भ्रमित करते थे। इसके बाद कॉल सेंटर के माध्यम से संपर्क कर हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और विश्वविद्यालयों की फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने का झांसा देते थे। फर्जी वेबसाइट को लेकर माध्यमिक शिक्षा परिषद की तहरीर पर 26 सितंबर 2025 को परिषद के अपर सचिव सत्येंद्र कुमार सिंह की तहरीर पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इसी एफआईआर की जांच के दौरान यह गिरोह पकड़ में आया। पुलिस ने बताया कि गिरोह में अन्य लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
खाते में पैसा लेकर कूरियर से भेजते थे मार्कशीट
प्रकरण का खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि आरोपी विभिन्न विश्वविद्यालयों की नकली मोहर, होलोग्राम और दस्तावेज तैयार कर 4 से 5 हजार रुपये प्रति प्रमाणपत्र वसूलते थे। इसके लिए वह छात्र ओर उनके अविभावकों से खाते में पैसा लेकर तैयार दस्तावेज को कूरियर से उनके पते पर भेज देते थे। पुलिस के मुताबिक, गिरोह अब तक करीब 7000 फर्जी अंकपत्र तैयार कर बाजार में खपा चुका है। आरोपी अधिकतर यूपी बोर्ड के साथ ही छत्रपति साहू जी महराज यूनिवर्सिटी कानपुर, शोभित युनिवर्सिटी, और अन्नामलाई युनिवर्सिटी तेलंगाना की की फर्जी मार्कशीट और डिग्री तैयार करते थे।