फांसी की सजा की पुष्टि के लिए जिला अदालत से भेजे गए संदर्भ और दोनों दोषियों की ओर से दाखिल अपील पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद उन्हें दोषमुक्त कर दिया। अपने 31 पेज के फैसले में कोर्ट ने पुलिस की विवेचना और अभियोजन की कड़ी आलोचना भी की। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने इकबालिया बयान के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तार तो की लेकिन हत्या के कारण का पता लगाने ने विफल रही। जबकि अभियोजन मामले को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
कोर्ट ने कहा केवल इकबालिया बयान और बरामदगी के आधार पर किसी को दोषसिद्ध नही किया जा सकता। किसी भी अपराध के पीछे दुराशय को साबित किया जाना दोषसिद्धि की आवश्यक शर्त है, जिसे साबित करने में अभियोजन असफल रहा है।