इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के वीसी ने कहा कि वे इस्तीफा देने को हैं तैयार
प्रोफेसर केएस मिश्रा और प्रोफेसर ए.सत्यनारायण के बीच वरिष्ठता के विवाद ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के विद्यार्थियों के सामने नया संकट खड़ा कर दिया है। रजिस्ट्रार ने एक आदेश जारी कर समाजशास्त्र विभाग को कला संकाय का हिस्सा मानने से मना कर दिया है। इससे विद्यार्थी सकते में हैं और उन्हें डिग्री की मान्यता की चिंता सताने लगी है। उनकी परेशानी यह है कि आखिर उनकी डिग्री किस संकाय की है। रजिस्ट्रार के इस आदेश के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खडे़ हो गए हैं कि अध्यापकों और अफसर आखिर करते क्या रहे। विभाग की स्थिति सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से विगत दो वर्ष में कोई पहल नहीं की गई।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया से अनुमति नहीं लेने की जवह से विश्वविद्यालय के एलएलबी और बीएएलएलबी की मान्यता संबंधी विवाद अभी पूरी तरह से थमा नहीं है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की लचर कार्यशैली का एक मामला और सामने आ गया है। एकेडमिक काउंसिल और कार्यपरिषद की मंजूरी के बाद समाजशास्त्र विभाग में स्नातक, परास्नातक की पढ़ाई के साथ डीफिल में भी प्रवेश लिए गए, लेकिन इसे विभाग की मान्यता दिए जाने तथा कला संकाय का हिस्सा बनाने के लिए ऑर्डिनेंस में भी संशोधन कराना होगा। ऑर्डिनेंस में संशोधन की प्रक्रिया 2012 में शुरू की गई, लेकिन प्रयास नाकाफी रहे। छात्रों का कहना है कि विजिटर (राष्ट्रपति) के यहां इस बारे में सिर्फ तीन बार फाइल भेजी गई। इसमें भी आखिरी दफे 2014 में विजिटर के यहां पत्रावली भेजी गई थी। इसके बाद कोई पहल नहीं हुई। इसी बीच वरिष्ठता का विवाद सामने आने के बाद रजिस्ट्रार ने आदेश जारी कर दिया कि समाजशास्त्र विभाग कला संकाय का हिस्सा नहीं है। इसलिए वह कला संकाय का डीन नहीं बन सकते।
इसके विपरीत विश्वविद्यालय की ओर से विभाग के सैकड़ों विद्यार्थियों को डिग्री दी गई। डिग्री कला संकाय की दी गई है। परास्नातक के विद्यार्थियों की डिग्री में तो सिर्फ समाजशास्त्र और कला संकाय का जिक्र है। इसके अलावा डीफिल कोर्स में प्रवेश भी विभाग को कला संकाय के अंतर्गत मानते हुए लिए गए। ऐसे में अब रजिस्ट्रार के आदेश के बाद इनकी डिग्री पर सवाल खड़ा हो गया है। खास यह कि अफसर भी इस बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे हैं। रजिस्ट्रार प्रोफेसर एनके शुक्ला का कहना है कि विद्यार्थियों की डिग्री पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। यह तकनीकी पहलू है।