केस नंबर 2-
लड़की बोली- मैं लड़का बनना चाहता हूं
सिविल लाइंस निवासी एक 15 वर्षीय लड़की को लगता था कि वह लड़का है। उसे हमेशा लड़कों की तरह रहना पसंद था। शुरुआत में परिजनों को यह सामान्य बात लगी। मगर बाद में उसकी हरकतें घर वालों को परेशान करने लगी। उसने लड़कियों के स्कूल में दाखिला लेने से मना कर दिया। अपनी फ्राक व सलवार सूट काे भी आग लगा दी। ऐसे में जब लड़की की काउंसलिंग शुरू हुई तो उसने कहा कि उसे लड़कों में कोई इंट्रेस्ट नहीं है, क्योंकि वह खुद एक लड़का है। फिलहाल लड़की की काउंसलिंग चल रही है।
काउंसलिंग से 98 फीसदी लोग सामान्य जीवन जीने लगते हैं
सोशल मीडिया से ज्यादा जुड़े रहने की वजह से इस प्रकार के मामले बढ़ रहे हैं। सबसे ज्यादा किशोर और किशोरियों में जेंडर परिवर्तन को लेकर उत्सुकता नजर आती है। हालांकि काउंसलिंग चलने के बाद लगभग 98 फीसदी लोग सामान्य जीवन जीने लगते हैं। परिजनों को चाहिए कि वह अपने बच्चों के हाव-भाव पर नजर रखें। सोशल मीडिया में किस साइट पर वह ज्यादा समय बिता रहें हैं, इसका भी ख्याल रखें। -पंकज कोटार्य, नैदानिक मनोवैज्ञानिक।