जेंडर बदलने की प्रक्रिया
वर्तमान में कई युवा हैं जिन्हें जेंडर बदलने का ख्याल मन में रहता है। ऐसे में इस प्रकार का कदम उठाना खुद के लिए और अपनों के लिए खतरनाक है। इसके लिए भी बकायदा प्रावधान है। अगर किसी को जेंडर बदलना है, तो वह पहले मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में आवेदन करे। अनुमति मिलने के बाद आवेदक की कई चरणों में काउंसलिंग होती है। इस दौरान बकायदा मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाता है। जिसमें फिजीशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, प्लास्टिक सर्जरी, यूरोलॉजी व न्यूरोलॉजी विभाग के चिकित्सक मौजूद होते हैं। करीब छह महीने तक बोर्ड अपनी रिपोर्ट तैयार करता है। जिसके बाद जेंडर बदलने पर फैसला होता है। वहीं मरीज को अपनी सारी उम्र हार्मोंस का इंजेक्शन लेना होता है। जो कि परिस्थिति के हिसाब से मरीज को दिया जाता है।
जेंडर बदलने की क्या होती है उम्र
लिंग परिवर्तन के लिए कोई निश्चित सही या गलत उम्र नहीं होती, बल्कि यह व्यक्ति की व्यक्तिगत परिस्थितियों, चिकित्सा सलाह और स्थानीय कानूनों पर निर्भर करता है। भारत में कानूनी तौर पर आप 18 वर्ष की आयु के बाद लिंग परिवर्तन करा सकते हैं, लेकिन किसी भी उम्र में यानी 18 साल की उम्र के बाद जब निश्चित हों, तो यह निर्णय ले सकते हैं। 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों के लिए, माता-पिता की सहमति या कानूनी अनुमति आवश्यक होती है और ऐसे मामलों में चिकित्सा मूल्यांकन के बाद 16 वर्ष की आयु से हार्मोन थेरेपी शुरू की जा सकती है।
प्राइवेट पार्ट में जहां घाव थे, वहां प्लास्टिक सर्जरी करके किशोर के जीवन को सुरक्षित किया गया। इस सर्जरी के बाद रक्तस्राव व इन्फेक्शन का खतरा कम हो गया है। अब आगे किशोर को कौन से जेंडर में आगे का जीवन व्यतीत करना है, इसके लिए काउंसलिंग की जाएगी। जिसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है। - डॉ. मोहित जैन, विभागाध्यक्ष, प्लास्टिक सर्जरी विभाग, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज।