विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मौसम का पारा चढ़ने और एसी, फ्रिज, कूलर का अधिक इस्तेमाल होने से मांग बढ़ी है। साथ ही विभाग की ओर से चलाए गए अभियानों के दौरान हजारों कनेक्शनों के लोड भी बढ़ा है। बिजली की इतनी मांग के बावजूद स्थिति काबू में है। फाल्ट की घटनाएं और ट्रांसफॉर्मर की ओवरलोडिंग भी कम हो रही है।
अप्रैल में ही पड़ रही भीषण गर्मी से संगमनगरी में बिजली की मांग में जबरदस्त उछाल है। यह पहली बार है कि अप्रैल में ही 500 मेगावाट से अधिक बिजली की मांग शहर में हो रही है। अधिकारियों का मानना है कि 510 मेगावाट की मांग मई-जून में पड़ने वाली भीषण गर्मी के बीच होती थी। वहीं, इस बार अप्रैल में ही बिजली की मांग में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। हर दिन 10-15 मेगावाट बिजली की मांग में बढ़ोतरी हो रही है। साथ ही अब तक 257 ट्रांसफॉर्मर फुंक चुके हैं।
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विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मौसम का पारा चढ़ने और एसी, फ्रिज, कूलर का अधिक इस्तेमाल होने से मांग बढ़ी है। साथ ही विभाग की ओर से चलाए गए अभियानों के दौरान हजारों कनेक्शनों के लोड भी बढ़ा है। बिजली की इतनी मांग के बावजूद स्थिति काबू में है। फाल्ट की घटनाएं और ट्रांसफॉर्मर की ओवरलोडिंग भी कम हो रही है।
ट्रांसमिशन विभाग के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो प्रयागराज में 28 मार्च को बिजली की मांग 320 मेगावाट के करीब थी। महज एक महीने में ही यह आंकड़ा बढ़कर 510 मेगावाट तक पहुंच चुका है। पिछले पांच दिनों में ही शहर में 70 मेगावाट का बिजली का लोड बढ़ा है। मांग अधिक होने से ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफॉर्मर भी फुंकने लगे हैं।
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अप्रैल में ही बिजली की मांग में भारी उछाल से विभागीय अधिकारियों का मानना है कि मई और जून में इस बार यह 650 से 670 मेगावाट तक पहुंच जाएगी। अधिशासी अभियंता रवींद्र पाल के मुताबिक इस बार ट्रांसफॉर्मर के लोड बढ़ाने का बंपर मिला है। इससे ट्रांसफॉर्मर दगने और लोकल फाल्ट के मामले कम हुए हैं।
जिले में अब तक फुंके 257 ट्रांसफॉर्मर
अप्रैल में ही बिजली के ट्रांसफॉर्मर दम तोड़ने लगे हैं। रविवार तक जिले में कुल 257 ट्रांसफॉर्मर फुंक चुके हैं। इनमें शहरी क्षेत्र में सात और बाकी के गंगापार व यमुनापार के हैं। सबसे अधिक संख्या 10 केवीए के ट्रांसफॉर्मर दगे हैं, जिनकी संख्या 187 है।