इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रेमी संग जाने या यात्रा करने को अपहरण और निकाह के बाद बने शारीरिक संबंध को दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अनिल कुमार दशम की अदालत ने 20 वर्ष पुराने अपहरण और दुष्कर्म के आरोप में ट्रायल कोर्ट कानपुर देहात से सात साल कैद की सजा पाए युवक की दोषसिद्धि के फैसले को पलट दिया।
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2005 में पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि उनकी 16 वर्षीय बेटी को युवक बहला-फुसलाकर ले गया और दुष्कर्म किया। इस पर ट्रायल कोर्ट ने सात साल की सजा सुनाई तो युवक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने उसे बरी कर कहा कि अभियोजन आरोपी के खिलाफ लगे आरोप को सिद्ध करने में नाकाम रहा। कोर्ट ने पाया कि पीड़िता मर्जी से प्रेमी संग भोपाल समेत कई स्थानों पर गई, साथ रही और कालपी में निकाह भी किया। इससे यह स्पष्ट है कि पीड़िता संग जोर-जबरदस्ती नहीं की गई।