प्रयागराज से मुंबई तक के सफर में अब एक से दो घंटे की बचत होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि अब इस रूट पर सिर्फ इलेक्ट्रिक इंजन लगी ट्रेनों का ही संचालन होगा। केंद्रीय रेल विद्युतीकरण संगठन (कोर) प्रयागराज ने इस पूरे रेलमार्ग के विद्युतीकरण का काम पूरा कर लिया है।
इस रेलमार्ग के सिर्फ कटनी-सतना रेलखंड में ही विद्युतीकरण का कार्य रह गया था। यह पूरा होने के बाद सोमवार को कमिश्नर रेलवे सेफ्टी ( सीआरएस) सेंट्रल सर्कल मुंबई एके जैन ने सतना से कटनी रूट का निरीक्षण भी किया। उनकी ओके के बाद अब प्रयागराज से मुंबई तक सभी यात्री ट्रेनों में इलेक्ट्रिक इंजन ही लगेंगे।
मुंबई से इटारसी के बीच रेल विद्युतीकरण क कार्य 1993 में ही पूरा हो गया था। इसके बाद रेलवे बोर्ड वर्ष 2012-13 में इटारसी-जबलपुर-सतना-प्रयागराज खंड के विद्युतीकरण के लिए 866.12 करोड़ स्वीकृत किए।
खंड वार यह काम शुरू हुआ। लॉक डाउन अवधि में सतना-कटनी के बीच 95 किमी की दूरी का काम काफी तेजी से किया गया। सोमवार को सीआरएस की ओके के बाद इस रूट पर अब डीजल इंजन की बजाय इलेक्ट्रिक इंजन वाली ट्रेनें ही संचालित होंगी। डीजल इंजन बदलने के दौरान लगने वाले समय में भी बचत होगी।
कोर के सीपीआरओ अमिताभ शर्मा ने बताया कि हावड़ा से प्रयागराज होते हुए मुंबई जाने वाला यह महत्वपूर्ण रेलमार्ग है। प्रयागराज से हावड़ा के बीच 60 के दशक के अंत में ही विद्युतीकरण का कार्य हो गया था। कहा कि प्रयागराज-मुंबई रूट पर मई 2020 में ही मालगाड़ियों का संचालन शुरू हो गया था।
सतना से कटनी के बीच 40 यात्री ट्रेनों में डीजल इंजन लगाया जा रहा था। इससे समय भी ज्यादा लगता था। लेकिन अब हावड़ा से जो इलेक्ट्रिक इंजन ट्रेन में लगेगा वह प्रयागराज के रास्ते मुंबई तक सीधा जाएगा। कहा कि इससे डीजल खर्च भी बचेगा और पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।