स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन)
एसआरएन में चूहों को भगाने के लिए पहले से ही हाउस कीपिंग नाम की संस्था काम कर रही थी। वहीं अमर उजाला की खबर प्रकाशित होने के बाद कार्यदाई संस्था को एक कार्य योजना के तहत काम करने का निर्देश दिया गया। जिसके बाद यहां के सभी वार्डों, स्टोर और कार्यालय में चूहा पकड़ने वाले पैड, चूहेदानी, दवा का छिड़काव, चूहों के बिलों को ढकने, वार्डों में साफ-सफाई सहित कुल 25 बिंदुओं की कार्य योजना के तहत काम शुरू किया गया।
इसके अलावा सभी वार्डों में दवा का रखने के लिए 25 आलमारी खरीदी गई है। वहीं 33 आदमारी पहले से ही मौजूद थी। वहीं कार्यदाई संस्था के काम की निगरानी विशेष टीम कर रही है। इसके अलावा दवा को आलमारी में रखने का सख्त निर्देश स्वास्थ्य कर्मियों को दिया गया है।
मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (कॉल्विन)
कॉल्विन की लॉड्री और मेस के पास चूहों का ज्यादा खतरा था। इसे अलावा एमरजेंसी वार्ड में भी चूहे मरीजों को परेशान कर रहे थे। वहीं अब लॉड्री, मेस और एमरजेंसी के पास विशेष तौर पर दवा का छिड़काव किया जा रहा है। वहीं जहां से चूहे आ रहे हैं, उन श्रोतों को समाप्त करने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा कार्यदाई संस्था को सही से काम करने की हिदायत दी गई है। जिसके लिए एक माह का समय निर्धारित किया गया है। यहां भी कार्यदाई संस्था के कार्य पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। ऐसे में अगर परिणाम सकारात्मक नहीं, तो संस्था से काम वापस ले लिया जाएगा।
जिला महिला चिकित्सालय डफरिन
डफरिन में चूहों को भगाने के लिए कोई कार्यदाई संस्था तो नहीं लगाई गई है, मगर यहां पे चूहे दानी की संख्या में इजाफा किया गया है। पहले जहां 10 से 15 चूहे दानी से काम चलाया जा रहा था। वहीं अब 50 से 60 चूहे दानी अलग से मंगाकर वार्डों में रखी गई है। इसके अलावा चूहों को भगाने के लिए दवा का छिड़काव भी निरंतर किया जा रहा है। वहीं नए वित्तीय वर्ष में चूहों के उत्पात को कम करने के लिए कार्यदाई संस्था को जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी शुरू हो चुकी है।