छह चक्का ट्रक का वाराणसी का किराया 7500-7700 रुपये था, अब 8200 से 8500 रुपये कर दिया गया है। कानपुर और लखनऊ का किराया 8500-8800 था, वह 9200-9500 व आगरा का 14 हजार से बढ़कर 15 हजार रुपये हो गया है। टाटा मैजिक जिसे अधिकांश ट्रांसपोर्टर छोटा हाथी कहते हैं, उसका वाराणसी का किराया अब 4000-4200 एवं कानपुर का 6000-6200 रुपये कर दिया गया है।
बाजार विशेषज्ञों की मानें तो मालभाड़ा बढ़ने का सबसे पहला और सीधा असर हरी सब्जियों, फलों, दालों व पैकेज्ड फूड जैसी रोजमर्रा की चीजों पर पड़ेगा। ये सामग्रियां दूसरे शहरों से ट्रकों के जरिये ही प्रयागराज पहुंचती हैं। यहां से बाहर भेजी जाती हैं, इसलिए इनकी लागत बढ़ना तय है। आने वाले एक-दो दिनों में ही खुदरा बाजारों में इस महंगाई का असर साफ तौर पर दिखने की आशंका जताई जा रही है।
ट्रांसपोर्टर बोले, मालभाड़ा बढ़ाना मजबूरी
मालभाड़ा बढ़ाने को लेकर ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि यह उनकी मजबूरी है। सरकार ने पहले टोल टैक्स बढ़ाया और अब डीजल के दाम में तीन रुपये की वृद्धि कर दी। इलाहाबाद गुड्स ट्रांसपोर्ट एंड मोटर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल कुशवाहा, ट्रांसपोर्टर अनीष जायसवाल का कहना है कि मजबूरी में मालभाड़ा की वृद्धि करनी पड़ी। अनिल कुशवाहा के अनुसार 12 चक्का वाले बड़े ट्रक से अब कानपुर, लखनऊ का मालभाड़ा 15000 से बढ़ाकर 16500 किया गया है। दिल्ली का भाड़ा 50 की जगह 54 हजार किया गया है। कोलकाता का मालभाड़ा 56 हजार से बढ़कर अब 62 हजार हो गया है।