घटना की जानकारी दूसरे दिन वन विभाग को दी गई तो सर्च आपरेशन चलाया गया लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लग सका। फूलपुर के वन क्षेत्राधिकारी लक्ष्मीकांत दुबे ने बताया कि सर्च आपरेशन चलाया जा रहा है। पर अब तक तेंदुए के पैरों के निशान भी परिसर के भीतर नहीं मिले हैं। ऐहितायत के तौर पर एचआरआई के वैज्ञानिकोंं और शोधार्थियों को रात के वक्त अपने कमरों से बाहर निकलने के लिए मना किया गया है।
12 अक्टूबर 2025 को एचआरई में पहली बार देखा गया था तेंदुआ, पांच नाइट विजन कैमरे और पिंजड़े भी हैं लगे
छतनाग वार्ड में गंगा के किनारे स्थित हरिश्चंद्र शोध संस्थान में पहली बार 12 अक्टूबर 2025 को तेंदुए को देखा गया था। इसके बाद वन विभाग ने तेंदुए को दबोचने के लिए वन विभाग ने एचआरआई परिसर में पांच नाइट विजन कैमरे और चार पिंजड़े लगाए। पर अब तक तेंदुआ न तो किसी भी नाइट विजन कैमरे में देखा गया और न ही पिंजड़े में उसे कैद किया जा सका है। शनिवार को वन क्षेत्राधिकारी लक्ष्मीकांत दुबे एवं उप वन क्षेत्राधिकारी सत्येंद्र चौधरी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। घंटों सर्च आपरेशन चलाया गया लेकिन कोई सुराग नहीं लग सका।