गांव के लोगों का आरोप था कि वे कनेक्शन के लिए पिछले 10-12 वर्षों से बिजली विभाग के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। पहले तो विभाग ने गांव तक लाइन ही नहीं पहुंचाई और जब लोगों ने खुद पैसा इकट्ठा कर ट्रांसफॉर्मर लगवाया तो कनेक्शन देने के नाम पर सबको बिजली चोरी का चालान थमा दिया गया।
गांव वालों का ही आरोप है कि दो साल पहले सरकारी ट्रांसफॉर्मर लगाया गया था, जिससे सिर्फ एक-दो घरों में ही कनेक्शन दिया गया। यह ट्रांसफॉर्मर भी स्थापना के दो महीने बाद ही फुंक गया, जिसे दो वर्ष बाद भी नहीं बदला जा सका है। बांस-बल्ली के सहारे लोग एक किलोमीटर दूर से अवैध रूप से लाइन खींचकर बिजली का इस्तेमाल कर रहे थे।
गांव के लोगों ने ही कहा कि अप्रैल-मई में बिजली विभाग के लोग आए और गांव में सबका नाम कागज पर लिखकर ले गए, ताकि सबको कनेक्शन दिया जा सके। इसके बाद ही सभी को बिजली चोरी के चालान थमाए गए थे। गांव के अधिकतर लोग मजदूरी करते हैं। लाख-लाख रुपये का बिजली चोरी का चालान मिलने पर सबके होश उड़े हुए हैं।