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विवाद और संसाधनों की कमी से पिछड़ रहे बास्केटबाल के खिलाड़ी

Thu, 31 Mar 2016 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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‌व‌िशेष भृगुवंशी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित प्रमोशनल बास्केटबाल मैच में बुधवार को हिस्सा लेने आए राष्ट्रीय बास्केटबाल टीम के कप्तान विशेष भृगुवंशी ने मौजूदा हालात पर चिंता जताई। कहा कि बास्केटबाल दो यूनियनों के बीच अटका हुआ है, जिसके चलते इस खेल की प्रतिभाओं को पूरा मौका नहीं मिल पा रहा है। अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत में विशेष ने क्रिकेट, बैडमिंटन, कबड्डी, हॉकी जैसे खेलों की तरह खिलाड़ियों के प्रोत्साहन और उनको आगे बढ़ाने के लिए लीग शुरू किए जाने की जरूरत बताई। कहा कि इससे बास्केटबाल भी लोगों में अपनी जगह बनाएगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बास्केटबाल के हालात पर चिंता जताई। कहा कि यहां पर खिलाड़ियों के खेलने के लिए इनडोर मैदान नहीं है। खिलाड़ी जब आउटडोर प्रैक्टिस करते हैं तो नेशनल और इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में जाकर अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं।
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  उन्होंने कहा कि आज देश में नेशनल स्तर का ऐसा कोई भी स्टेडियम नहीं है जो इंटरनेशनल स्तर के  मॉनक को पूरा करता हो। नोएडा में जेपी ग्रुप ने एक इनडोर स्टेडियम बनाया है, जहां खिलाड़ी बेहतर अभ्यास कर पाते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय टीम के मौजूदा प्रदर्शन पर संतोष जताया। कहा कि तीन सालों में टीम में काफी सुधार हुआ है और एशियन टीमों में इसकी रैंकिंग सुधरकर आठवें नंबर पर आ गई है।  

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए उत्तर प्रदेश बास्केटबाल टीम के महिला टीम के कोच विभोर भृगुवंशी और पुरुष टीम के कोच उपेंद्र कुमार सिंह ने भी प्रदेश में बैडमिंटन के हालात पर चिंता जताई। कहा कि यहां तो खिलाड़ियों के लिए केवल आउटडोर स्टेडियम है। इनडोर न होने से खिलाड़ियों को बेहतर माहौल नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा यहां जो प्रशिक्षण कैंप आयोजित किया जाता है, वह 15 दिनों का होता है, जबकि देश के दूसरे राज्यों में दो से ढाई महीने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा खिलाड़ियों के लिए प्रतियोगिताएं भी कम ही होती हैं। उन्होंने नेशनल प्रतियोगिताओं का हवाला दिया। कहा कि नेशनल स्तर पर विभिन्न वर्गों में चार प्रतियोगिताएं होती हैं। सरकारी प्रतियोगिताएं होती ही नहीं हैं। इसके अलावा महिला खिलाड़ियों के लिए जॉब के अवसर भी कम ही हैं।  
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