रैगिंग के आरोप में इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के तीन छात्रों को डायमंड जुबली हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया है। शिकायत पर हुई जांच के आधार पर चीफ प्रॉक्टर प्रो. राकेश सिंह ने बृहस्पतिवार को यह कार्रवाई की।
चीफ प्राॅक्टर को शिकायत मिली थी कि कुटीलिया सैंडई जेठवारा प्रतापगढ़ निवासी विधि द्वितीय वर्ष के छात्र आकाश मिश्र, खागा फतेहपुर निवासी एमए द्वितीय वर्ष के छात्र अच्युत त्रिपाठी व भतरा जिगना मिर्जापुर निवासी एमकाॅम द्वितीय वर्ष के छात्र कुलदीप सिंह डायमंड जुबली हॉस्टल में अपने जूनियर को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। चीफ प्रॉक्टर कार्यालय के साथ एंटी रैगिंग पोर्टल पर भी दो बार इसकी शिकायत की गई थी।
यह शिकायत भी मिली थी कि इंट्रो के नाम पर तरह-तरह की शारीरिक प्रताड़नाएं दी जाती हैं। इस मामले की जांच कराई गई तो प्रथमदृष्टया आरोप तथ्यपूर्ण पाए गए। नोटिस में कहा गया है कि यह कृत्य रैगिंग की श्रेणी में गंभीर अपराध माना गया है। साथ ही यह कृत्य विश्वविद्यालय की अनुशासनसंहिता/नियमावली का घोर उल्लंघन एवं अपराध की श्रेणी में आता है। इसलिए तीनों को तत्काल प्रभाव से इविवि से निलंबित करते हुए छात्रावास से निष्कासित किया जाता है।
चीफ प्रॉक्टर ने तीनों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा है कि उन्हें अपने पिता/अभिभावक के साथ (उनके परिचय-पत्र सहित) 16 जनवरी को अपराह्न तीन बजे से चार बजे के मध्य कुलानुशासक कार्यालय में उपस्थित होकर लिखित रूप से बताएं कि उन्होंने ऐसा कृत्य क्यों किया और इस कृत्य के लिए क्यों न उन्हें विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत्त उपाधि (यदि दी गई हो) और विश्वविद्यालय के किसी भी पाठ्यक्रम में उनका प्रवेश निरस्त करते हुए विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया जाए।
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व्हाट्सएप ग्रुप पर मिले रैगिंग के साक्ष्य
- चीफ प्रॉक्टर प्रो. राकेश सिंह ने बताया कि जूनियर छात्रों ने एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बना रखा था। छात्रों को जब रैगिंग के बुलाया जाता था या उनके साथ रैगिंग की जाती थी तो छात्र उसी व्हाट्सएप ग्रुप पर एक-दूसरे से बात करते थे। व्हाट्सएप ग्रुप की जांच में भी प्रथम दृष्टया रैगिंग के आरोप सही पाए गए हैं।