Three railway workers terminated, union leader upset
दो लोको पॉयलट और उसके पहले एक स्टेशन मास्टर की रेल सेवा समाप्त करने के मामले में रेलवे यूनियन नेताओं ने खासी नाराजगी जताई है। यूनियन नेताओं का तर्क है कि जिन वजहों से रेलकर्मियों की रेल सेवा समाप्त की गई, उसके लिए संबंधित रेलकर्मियों को सफाई तक का मौका नहीं दिया गया। कहा कि इस संबंध में महाप्रबंधक एनसीआर के समक्ष आपत्ति दर्ज की जाएगी।
दरअसल, विंध्याचल के निकट सिगनल ओवर शूट के मामले में लोको पॉयलट अशोक कुमार सिंह यादव और असिस्टेंट लोको पॉयलट चंदन वर्मा की रेल सेवा समाप्त कर दी गई है। इसके पूर्व 27 जनवरी को चुनार स्टेशन के स्टेशन मास्टर संजीव कुमार की सेवा समाप्त की गई। स्टेशन मास्टर पर आरोप है कि इंजीनियरिंग की ओर से लिया गया ब्लॉक तय समय से पहले खोल दिया था। इन तीनों ही प्रकरणों में नियम 14/2 के तहत कार्रवाई की गई। नार्थ सेंट्रल रेलवे इंपलाइज संघ के महामंत्री आरपी सिंह ने रेलवे की इस कार्रवाई पर अपना विरोध दर्ज कराया है।
उनका कहना है कि नियम 14/2 के तहत कार्रवाई करने में जल्दबाजी बरती गई। कम से कम इन तीनों ही प्रकरणों में पहले संबंधित रेलकर्मियों के बयान लेने चाहिए थे। उन्हें चार्जशीट दी जानी चाहिए थी। अचानक रेल सेवा क्यों समाप्त की गई, यह बात समझ से परे है। कहा कि इस प्रकरण में वह जीएम एनसीआर से भी मिलेंगे। वहीं नार्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन के महामंत्री आरडी यादव ने कहा कि कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थे। यूनियन प्रयास करेगी कि संबंधित रेलकर्मियों की बहाली हो।
मालगाड़ी के ब्रेक में खामी की सामने आ रही बात
विंध्याचल के निकट पांच फरवरी को इलाहाबाद आ रही मालगाड़ी को चला रहे लोको पॉयलट और असिस्टेंट लोको पॉयलट को सिग्नल ओवर शूट के मामले में भले ही रेल प्रशासन ने उनकी रेल सेवा समाप्त कर दी हो, लेकिन इस मामले में कुछ और ही बात सामने आ रही है। चर्चा है कि मालगाड़ी के ब्रेक में उस दिन कुछ खामी आ गई थी। चालक ने लाल सिग्नल देखते हुए ब्रेक लगाया भी, लेकिन खामी होने की वजह से सिग्नल ओवर शूट हो गया। हालांकि रेलवे की ओर से ब्रेक खामी की किसी भी तरह की कोई बात स्वीकार नहीं की गई है।