जिला अदालत ने 35 साल पुराने हत्या के मामले में 80 वर्षीय बुजुर्ग मां की गवाही पर तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश पंकज कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने दिया है।
जिला अदालत ने 35 साल पुराने हत्या के मामले में 80 वर्षीय बुजुर्ग मां की गवाही पर तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश पंकज कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने दिया है।अदालत ने रामधारी, मुंदर और फूलचंद्र को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड से भी दंडित किया है। मुकदमे के दौरान अन्य नामजद आरोपियों की मृत्यु हो जाने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी।
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अभियोजन के अनुसार आठ मार्च 1991 को करछना के महेवा गांव में हरिलाल मां शिवकली के साथ खेत में अरहर काट रहा था। इसी दौरान किसी बात को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि रामधारी, मुंदर, फूलचंद्र समेत अन्य लोगों ने हरिलाल के साथ लाठी-डंडे और धारदार हथियारों से मारपीट की। हमले में हरिलाल गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद मामले की विवेचना कर आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। मुकदमे की लंबी सुनवाई के दौरान मृतक की मां शिवकली ने अदालत में गवाही दी। उनकी गवाही के साथ अभियोजन ने अन्य मौखिक और चिकित्सीय साक्ष्य भी प्रस्तुत किए। इसके बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी माना और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।