पीसीएस-2017 की मुख्य परीक्षा के पहले दिन एक सेंटर में पैकेट में निर्धारित संख्या से कम पेपर निकलते हैं और हंगामा होता है। दूसरे दिन गलत पेपर बांटने पर सामान्य हिंदी और निबंध की परीक्षा निरस्त कर दी जाती है और जमकर बवाल होता है। तीसरे दिन समाज कार्य का फर्जी पेपर देर रात व्हाट्स एप पर वायरल कर दिया जाता है। प्रदेश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित परीक्षा के साथ हर दिन हो रही कोई न कोई घटना महज एक संयोग तो नहीं हो सकती। इसके पीछे किसी न किसी का हाथ है, जिसकी जांच खुद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के सचिव और उपसचिव कर रहे हैं। इन सबके बीच लगातार हो रही घटनाओं के पीछे आयोग के ही कुछ कर्मचारियों और अफसरों के हाथ होने की आशंका जताई जा रही है।
इन दिनों आयोग की भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच चल रही है। परीक्षाओं में गड़बड़ी के लिए सीबीआई ने आयोग के कुछ अफसरों और कर्मचारियों को चिह्नित कर उनसे पूछताछ भी की है और आपराधिक धाराओं में दर्ज मुकदमे के तहत नोटिस जारी किया है। सीबीआई ने एक समीक्षा अधिकारी को भी चिह्नित किया है, जिसकी शहर में कोचिंग चलती है और इस कोचिंग में आयोग की परीक्षाओं की तैयारी करने वाले प्रतियोगी पढ़ते हैं। जांच में सीबीआई को सुराग मिले हैं कि इस कोचिंग के जरिये प्रतियोगियों के बीच परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारियां लीक की जाती थीं। सीबीआई की आपत्ति के बाद आयोग के सचिव ने संबंधित समीक्षा अधिकारी का अनुभाग बदल दिया।
आशंका जताई जा रही है कि इस घटना के पीछे इस अफसर को हाथ हो सकता है ताकि सीबीआई जांच को प्रभावित किया जा सके। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई जांच में फंस रहे आयोग के ही कुछ अन्य भ्रष्ट अफसरों और कर्मचारियों का नया गुट तैयार हो गया है, जो आयोग के सचिव से नाराज और कुछ अफसरों से नाराज हैं, क्योंकि वे सीबीआई जांच में लगातार सहयोग कर रहे हैं। भ्रष्ट अफसरों और कर्मचारियों पर सीबीआई का शिकंजा कसता जा रहा है। ऐसे में लगातार हो रही इन घटनाओं को साजिश से जोड़कर देखा जा रहा है।
इस पूरे मामले में बाहरी लोगों की आयोग के कुछ अफसरों और कर्मचारियों से मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। परीक्षा के आयोजन के पहले से ही इसका विरोध शुरू हो गया था और लगातार आंदोलन जारी रहा। पेपर गलत बंटने के बाद आंदोलन बवाल में बदल गया। खास यह कि इस आंदोलन और बवाल का नेतृत्व ऐसे छात्र नेता कर रहे थे, जिन्हें परीक्षा में शामिल ही नहीं होना था। आंदोलन में शामिल सात अभ्यर्थियों को जब रात भर थाने के लॉकअप में रहना पड़ा तो दूसरे दिन जमानत के लिए इन छात्र नेताओं में से कोई भी थाने नहीं पहुंचा। इसके बाद प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति ने अभ्यर्थियों की जमानत कराई।
जीआईसी केंद्र में गलत पेपर बांटे जाने के मामले में आयोग के दो कर्मचारियों का गाज गिरना तय माना जा रहा है। आयोग के अनु सचिव सतीश चंद्र मिश्र की ओर से जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है, उनमें पर्यवेक्षक और सहायक पर्यवेक्षक भी शामिल हैं और दोनों ही आयोग के कर्मचारी हैं। इन दोनों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है। आयोग के सचिव जगदीश और उप सचिव मोइनउद्दीन की कमेटी इस पूरे मामले की जांच कर रही है। सचिव का कहना है कि जल्द ही जांच पूरी होगी और कार्रवाई जरूर होगी।
पीसीएस मुख्य परीक्षा में एक दिन पेपर गलत बंटने और दूसरे दिन फर्जी पेपर व्हाट्सएप पर वायरल होने के पीछे भले ही कुछ लोगों का हाथ रहा हो लेकिन उनकी वजह से हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। एक केंद्र में गड़बड़ी के कारण पूरे प्रदेश में सामान्य हिंदी और निबंध की परीक्षा निरस्त कर दी गई और अभ्यर्थियों की दिन-रात की मेहनत पर पल भर में पानी फिर गया। बुधवार देर रात समाज कार्य विषय का फर्जी पेपर व्हाट्स एप पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया और अभ्यर्थी फिर तनाव में आ गए। परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों के बीच लगातार इस तरह के संदेश पहुंचाए जा रहे हैं, जो उनकी तैयारी को प्रभावित कर रहे हैं।