शत्रुता का भाव त्याग शिव नाम का जाप कर रहे हैं यूक्रेन और रूस से आए विदेशी संत
विश्व बंधुत्व का भाव भारतीय संस्कृति का मूल है जिसमें सभी तरह के भेद और विचारों का शमन हो जाता है। सनातन के गर्व, महाकुंभ पर्व पर शांति, मुक्ति और सद्भाव की त्रिवेणी प्रवाहित हो रही है। प्रयागराज महाकुंभ में पायलट बाबा के शिष्य महा मंडलेश्वर स्वामी विष्णुदेवानंद जी के शिविर में इसकी एक अद्भुत झलक देखने को मिल रही है। यहां युद्धरत देशों यूक्रेन और रूस के नागरिक एक ही मंच पर एक साथ अपने गुरु के सानिध्य में विश्व शांति के लिए शिवनाम का जाप कर रहे हैं। रूस के नागरिक एंड्री बताते हैं कि पहली बार वह त्रिवेणी संगम आए हैं, यहां इतने सारे लोगों को एक साथ देखकर आंखों को यकीन दिलाना मुश्किल है।
गंगा में डुबकी लगाना एक रहस्य जैसा अनुभव है। एंड्री कहते हैं कि वह भगवान शिव के भक्त हैं और इसलिए वह विश्व की शांति की कामना के लिए अपने गुरु के चरणों में प्रार्थना करते हैं, सभी भेद अब मिट गए हैं। वहीं, यूक्रेन से आए ओली सिमोवा भी स्वामी विष्णुदेवानंद जी के शिविर में रूसी नागरिक एंड्री के साथ मिलकर शिवनाम का जाप करते हैं। सिमोवा बताते हैं कि दस साल से वह इंडिया आ रहे हैं। गुरु के मार्ग दर्शन में भगवान शिव का ध्यान ही उनकी दुनिया है उनके लिए देश और राज्य की सीमाओं का भेद अब मिट चुका है।