भारत के खिलाफ की गई साजिश
मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल जी ने अपने संबोधन में कहा कि हम विश्वविद्यालय चलाते थे। बड़े बड़े ग्रंथों के लिखने वाले हैं लेकिन युद्ध के मैदान में हार गए। जीते हुए लोग पराजित हुए लोगों के गुणों का सार्वजनिक स्मरण कभी नहीं करते। ऐसा ही हमारे साथ हुआ। अंत के दो साल अंग्रेजों के शासन में बीते। भांति भांति से हमारे देश के लोगों में यह बात गहराई से बैठाने का प्रयत्न किया गया कि भारत के लोग अशिक्षित लोग हैं। भारत के लोग असभ्य लोग हैं।
कुंभ की यह धरा सज्जन, संत और ऋषियों की धरा
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में अपना संबोधन देते हुए निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि दुनिया के सभी लोग भारत की परंपराओं को मानना, समझना और जानना चाहते हैं। कुंभ की यह धरा सज्जन, संत और ऋषियों की धरा है। यहां जितनी सेवा हमसे बन पाए, हम करें। दिव्य प्रेम सेवा मिशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ आशीष गौतम भैया जी ने कार्यक्रम में स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर मिशन के संयोजक और कार्यकारी अध्यक्ष संजय चतुर्वेदी, उपाध्यक्ष महेश चंद्र चतुर्वेदी, सह संयोजक राघवेंद्र सिंह, अवध बिहारी मिश्र सहित देश भर से आए सेवा मिशन के कार्यकर्ता एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।