उन्होंने एक वीडियो के जरिये कहा कि एक युवा के नाते वह यहां सनातन धर्म को करीब से समझने आईं थीं लेकिन, वह अपने गुरु को अपमानित होते नहीं देख सकतीं। इस वजह से वह समय से पहले ही कुंभनगरी को छोड़कर यहां से जा रही हैं। उधर, आचार्य महमंडलेश्वर स्वामी स्वामी कैलाशानंद गिरि ने इस पूरे विवाद को गैरजरूरी ठहराया। उनका कहना है कि जिस तरह से उनके अन्य अनुयायियों ने स्नान किया, उसी तरह उसने भी स्नान किया था। उसे साध्वी की कोई दीक्षा नहीं दी गई है।