फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘कई चांद थे सरे आसमां’, सितारा सिर्फ शम्सुर्रहमान

Thu, 01 Oct 2015 02:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
इलाहाबाद। जिंदगी के शानदार अस्सी बरस पूरे करने पर उर्दू अदब के नामवर नक्काद पद्मश्री शम्सुर्रहमान फारूकी का बुधवार को परिजनों और प्रशंसकों की ओर से अभिनंदन किया गया। अदब के लिए उनकी ओर से की गई खिदमत को याद करते हुए उन्हें लंबी उम्र की दुआएं दी गईं। अपनों से घिरे फारूकी सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित समारोह में पहुंचे तो उन्हें सभी ने उन्हें फूलों के गुलदस्ते के साथ मुबारकबाद दी। 80वीं सालगिरह समारोह में उन्हें बधाई देने के लिए समाज के हर वर्ग के लोग पहुंचे।
विज्ञापन


पद्मश्री फारुकी की नवासी नैसां की देखरेख में किदवई गर्ल्स इंटर कालेज की छात्राओं ने कव्वाली, ‘भर दो झोली मेरी या मोहम्मद, दर से मैं न जाऊंगा खाली’ और ‘पिया हाजी अली-पिया हाजी अली’ सुनाकर समां बांधा। फिर नैसां ने फैजी की एक गज़ल पेश करते तालियां बटोरीं। इसी क्रम में संस्था रंगयात्री की ओर से पूजा ठाकुर के निर्देशन में पद्मश्री फारुकी की कहानी ‘कब्जे-जमा’ और उपन्यास ‘कई चांद थे सरे आसमां’ के कई अंशों को मंच की भाषा में बखूबी प्रस्तुत किया गया। शादाब अहमद-सफलता श्रीवास्तव ने ‘कब्जे जमा’ में सूत्रधार जबकि राहुल चावला तथा ईश्वर तिवारी ने अन्य भूमिकाएं निभाईं। वहीं ‘कई चांद थे सरे आसमां’ में भी कलाकारों ने रचना से न्याय करते हुए मंच की भाषा में जीवंत किया। अदब के लिए पद्मश्री फारूकी के योगदान को याद करते हुए अजर रब ने संचालन किया।

कार्यक्रम में जस्टिस बी.अमित स्थालकर, वरिष्ठ कथाकार दूधनाथ सिंह, प्रोफेसर राजेंद्र कुमार, प्रोफेसर मुजाविर हुसैन, प्रोफसर जाफर रजा, प्रोफेसर ओपी मालवीय, कमरुल हसन सिद्दीकी, एडवोकेट अताउर्रब, कर्नल फाजिल रिज़वी, एमए कदीर, असरार गांधी, डॉ.फाजिल हाश्मी, रविनंदन सिंह, डॉ.रेहाना तारिक, तारिक शमीम, रवि किरन जैन, खुर्शीद नकवी, साद उस्मानी, प्रोफेसर अहमद महफूज समेत अदब से जुड़ी तमाम हस्तियों, शोधछात्रों, विद्यार्थियों ने मौजूदगी दर्ज कराई।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें