कुटुंब प्रबोधन कार्यशाला का चिन्मय मिशन सेवा आश्रम में समापन हुआ। प्रो. रविंद्र जोशी ने कहा, परिवार विश्वास पर आधारित है और परिवार में शक्ति, बल, शील, ओज, धैर्य, बुद्धि, दृष्टि और दक्षता की आवश्यकता होती है। हमारे परिवार टूट रहे हैं यह एक षड्यंत्र का हिस्सा भी हो सकता है। 10 परिवार पर एक कुटुंब मित्र बने जो उन दस परिवारों की चिंता करें। परिवारों में होने वाले कार्य-व्यवहार की जानकारी रखें।
उन्होंने कहा कि इसके लिए हमें समाज में ऐसी समझ रखने वाले लोगों को अपने कुटुंब प्रबोधन संगठन से जोड़ना होगा, जो चिकित्सा, विज्ञान और मनोविज्ञान में दक्ष हों। जिससे परिवार में आने वाली समस्याओं का निराकरण कराया जा सके। वह आपस में मिलजुल कर संवाद भी स्थापित करें। ऐसे ही परिवार एक समाज के हिस्सेदार होंगे और उस समाज के माध्यम से ही विकसित देश बन सकेगा।
प्रो. रविंद्र जोशी ने कहा कि भौतिकता की अंधी दौड़ में हमारे परिवार टूट रहे हैं। परिवार व्यवस्था विश्व को भारत वर्ष की अनोखी देन है। इसे हमें बचाना होगा। समापन सत्र को संयुक्त क्षेत्र संयोजक ओमपाल, क्षेत्र संयोजक अशोक उपाध्याय, डॉ. जेपी सिंह, विभाग संयोजक नरेंद्र श्रीवास्तव, डॉ. अयोध्या प्रसाद, वंश नारायण पाठक, बालकृष्ण और संयोजक डॉ. एसपी सिंह आदि ने संबोधित किया।