कोर्ट ने शासन से अनुमोदन लेने का दिया है निर्देश
मनीष ने इसका विरोध करते आपत्ति दर्ज कराई कि पर्यावरण विज्ञान विषय जंतु विज्ञान विज्ञान विषय से अंत: संबद्ध है। अभ्यर्थी कोर्ट गया और कोर्ट ने अभ्यर्थी के दावे को सही मानते हुए राहत प्रदान की। इसके बाद आयोग में एक कमेटी का गठन किया गया और कमेटी ने भी अभ्यर्थी को दावे को सही ठहराया। इस आधार पर मनीष सहित चार अभ्यर्थियों को चयनित घोषित करते हुए नियुक्ति प्रदान की गई।
कोर्ट ने इस पर शासन से अनुमोदन लेने के लिए भी कहा। आयोग ने कमेटी के निर्णय को शासन के पास भेज दिया और शासन ने भी उस पर मुहर लगा दी। इसके बाद विज्ञापन संख्या-47 और विज्ञापन संख्या-50 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती की गई और अंत: संबद्ध विषयों के विवाद से संबंधित जितने मामले थे, आयोग ने कमेटियां गठित करते हुए उनका निराकरण कराया।
इन तीनों विज्ञापनों के तहत अंत: संबद्ध विषयों से जुड़े तकरीबन 400 चयनितों को असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नौकरी प्रदान की गई और इन सभी मामलों में कमेटियों की ओर से लिए गए निर्णयों से शासन को अवगत कराया जाता रहा, लेकिन मनीष सोनकर प्रकरण के बाद अन्य मामलों में शासन की ओर से निर्णय पर आधिकारिक रूप से मुहर नहीं लगाई गई।
भविष्य में विवाद हुआ तो खतरे में पड़ेगी नौकरी
ऐसे में आयेाग को यह आशंका भी सता रही थी कि भविष्य में विवाद हुआ तो इन शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ जाएगी। इसके बाद आयोग ने फिर से प्रयास शुरू किया। मई के पहले सप्ताह में अपर मुख्य सचिव सुधीर महादेव बोबड़े ने आयोग के अफसराें के साथ ऑनलाइन बैठक की और पांच मई को आयोग के उप सचिव शिवजी मालवीय को लखनऊ बुला लिया।
उप सचिव से पूरा मामले समझने के बाद अब शासन ने विज्ञापन संख्या-46, 47 एवं 50 के तहत अंत: संबद्ध विषयों को लेकर आयोग की ओर से गठित कमेटियों के निर्णयों पर मुहर लगा दी है। साथ ही भविष्य में भी इसी के अनुरूप भर्ती करने के आदेश दिए हैं। आयोग विज्ञापन संख्या-51 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के 1017 पदों भर्ती करने जा रहा है। शासन के आदेश के बाद नई भर्ती में अब अंत: संबद्ध विषयों को लेकर कोई विवाद नहीं रह जाएगा।