शादी का बहाना बनाकर चुनावी ड्यूटी से नाम कटवाने की मांग करने वाले कर्मचारियों की यह झूठ जिंदगी भर उनके गले पड़ सकती है। इस तरह का आवेदन करने वाले कर्मचारियों की शादी की तारीख और भावी पत्नी का नाम तथा अन्य विवरण विभागीय रजिस्टर में दर्ज किए जा रहे हैं। यह प्रक्रिया बेटी, बेटा की शादी के आधार पर चुनावी ड्यूटी से छूट मांगने वाले कर्मचारियों के साथ भी अपनाई जा रही है। यानी, झूठ बोले तो भी शादी सच मानी जाएगी और पूरे जीवन पीछा नहीं छोड़ेगी।
सीडीओ की व्यस्तता इन दिनों कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। चुनाव की तैयारी तथा योजनाओं को लागू कराने की जिम्मेदारी तो है ही, उनके कक्ष के सामने चुनाव की ड्यूटी से नाम कटवाने वालों की भी लंबी कतार लग रही है। हर समय वहां ऐसे लोगों की भीड़ रहती है। ज्यादातर आवेदन शादी को आधार बनाकर छुट्टी मांगने के हैं। इसमें भी ज्यादातर ने खुद की शादी के लिए छुट्टी मांगी है। इसे देखते हुए अफसरों की टीम बनाई गई है, जो आवेदन की सत्यता की जांच करेंगे।
इसके अलावा शादी से सबंधित सभी आवेदनों का पूरा डिटेल संबंधित विभाग के रजिस्टर में भी दर्ज किया जाएगा। सीडीओ अरविंद सिंह ने बताया कि सभी विभागों को यह आदेश भेज दिया गया है। इसे सुनिश्चित भी किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस तरह से कर्मचारी या उसकी पुत्र-पुत्री की शादी का पूरा विवरण सरकारी दस्तावेज में दर्ज होगा। ऐसे में यदि उसने फर्जी कार्ड छपवाकर छुट्टी की मांग की है तो भविष्य में भी उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि बीमारी के आधार पर ड्यूटी से छूट मांगने की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है।
बैंक कर्मियों का अलग ही दर्द है। फरवरी, मार्च में वे शादी भी नहीं कर सकते। कुछ ऐसा ही दर्द बयां किया सीडीओ ऑफिस पहुंचे एक बैंक अफसर ने। शादी के नाम पर चुनावी ड्यूटी से छुट्टी मांगने या ट्रेनिंग की तारीख में परिवर्तन की मांग करने वालों में बैंक कर्मियों की अधिक संख्या है। इस पर विकास भवन के अफसरों ने सवाल उठाया तो बैंक कर्मी का जवाब था, ‘सर, बैंक में फरवरी मार्च में शादी के लिए छुट्टी ही नहीं मिलती। क्या करें...। सर, बड़े इंतजार के बाद शादी के लिए छुट्टी मिली है। आवेदन स्वीकार कर लिजिए।’