‘अमर उजाला’ की पहल पर शुक्रवार को करवाचौथ की पूर्व संध्या पर पति की सुरक्षा और उनकी दीर्घायु की कामना के साथ विभिन्न संस्थाओं की ओर से पतियों को हेल्मेट देकर उनसे उन्हें पहनने का संकल्प लेकर पर्व को सार्थकता दी गई।
करवाचौथ की पूर्व संध्या पर इनरव्हील क्लब ऑफ इलाहाबाद उदीशा की ओर से सिविल लाइंस स्थित एलचिको रेस्टोरेंट के करीब जुटी सुहागिनों ने अपने पतियों की दीर्घायु की कामना करते हुए उन्हें ‘हेल्मेट’ की सौगात दी। साथ ही उनसे हेल्मेट पहनने का वचन भी लिया। मकसद रहा, सुरक्षित ड्राइविंग की दिशा में पहल और पर्व, प्रार्थना के साथ प्रयास से भी जुड़े।
संयोजिका डॉ.कनिका अग्रवाल की देखरेख में हुए कार्यक्रम के तहत सिविल लाइंस के वीरेंद्र कुमार मदान सहित भारत, सुनील, सौरभ आदि को हेल्मेट बांटे गए। इसी क्रम में क्लब की ओर से दारागंज की उषा देवी ने वीरेंद्र, अल्लापुर की दुलारी ने सुनील, सिविल लाइंस की वंदना ने बलदेव, राखी सहित आधा दर्जन महिलाओं ने अपने पतियों को हेल्मेट देकर उनसे उसे पहनने का वचन लिया। कार्यक्रम में वंदना, भावना, आकांक्षा दरबारी, अमृता, श्वेता, एकता, मीना केसरवानी, प्रियांशा आदि सदस्यों ने सहयोग किया।
अखंड सौभाग्य और पति की मंगलकामना के लिए सुहागिनें शनिवार को करवाचौथ का व्रत रखेंगी। परंपरानुसार सूर्योदय से पहले उठकर सरगही खायी जाएगी जिसके बाद निर्जला व्रत आरंभ होगा। पर्व को लेकर सुहागिनों में गजब का उत्साह दिखा।
पर्व पर शाम को स्नान के बाद घर के आंगन या पूजा स्थल पर शिव-पार्वती, कार्तिकेय और गौरा की विधिपूर्वक पूजा करने सहित करवा की कथा भी सुनी जाएगी। चंद्रोदय पर चंद्रमा को चलनी से देखकर अर्घ्य दिया जाएगा। फिर सुहागिनें पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलेंगी। पति सहित घर के बुजुर्गों के पांव छूकर आशीर्वाद भी लिया जाएगा। अधिकतर घरों में सुहागिनें उसी करवे से पूजा करेंगी जिससे उन्होंने पहली बार पूजा आरंभ की थी लेकिन तमाम सुहागिनें मिट्टी के करवे से ही चंद्र को अर्घ्य देंगी। अपनी-अपनी परंपरा के मुताबिक सिंदूर, चूडियां, शीशा, कंघी, रिबन सहित सुहाग की तमाम चीजें रखकर अपने से बड़ी सुहागिन या सास के पांव छूकर उन्हें भेंट की जाएंगी।
करवाचौथ पर पूजन के लिए शनिवार को प्रदोष काल में शाम 6.35 बजे से रात आठ बजे तक शुभ मुहूर्त है। ज्योतिर्विद पंडित दिवाकर त्रिपाठी के मुताबिक चंद्रोदय 7.38 बजे होगा। इस बीच 7.59 बजे तक भद्रा है, लेकिन, स्वर्गभद्रा होने से यह दोषरहित है। फिर भी रात आठ बजे अर्घ्य देना श्रेयस्कर होगा।