सिंचाई विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार बृहस्पतिवार शाम चार बजे गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 78.88 मीटर तथा छतनाग में 76.88 मीटर पहुंच गया। वहीं, यमुना का जलस्तर 77.50 मीटर रहा। खतरे का निशान तो 84.73 मीटर पर है।
गंगा एवं यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसी के साथ बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन एवं अन्य विभागों ने तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को बचाव एवं राहत कार्यों का अभ्यास किया गया।
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सिंचाई विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार बृहस्पतिवार शाम चार बजे गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 78.88 मीटर तथा छतनाग में 76.88 मीटर पहुंच गया। वहीं, यमुना का जलस्तर 77.50 मीटर रहा। खतरे का निशान तो 84.73 मीटर पर है, लेकिन 80 मीटर तक जलस्तर पहुंचने पर ही बस्तियों में पानी पहुंचने लगता है। मुश्किल यह है कि दोनों नदियों के जलस्तर में दो सेमी प्रति घंटे की दर से बढ़ोतरी जारी है। ऐसे में बाढ़ खतरा मंडराने लगा है।
संगम क्षेत्र के वीआईपी घाट पर बृहस्पतिवार को जिला प्रशासन की अगुवाई में सेना, एसडीआरएफ, जल पुलिस, पीएसी की दो टीमों ने बाढ़ से बचाव का अभ्यास किया। इस दौरान डीएम संजय कुमार खत्री, एडीएम वित्त एवं राजस्व जगदम्बा सिंह, कर्नल विकास खरे, मेजर विनोद भलोटिया, राकेश कुमार तिवारी आदि मौजूद रहे।
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चौपाल लगाकर भूजल संरक्षण की दी जानकारी
भूजल सप्ताह के अंतर्गत बृहस्पतिवार को कौंधियारा में जल चौपाल का आयोजन किया गया। इस दौरान भूगर्भ जल विभाग के विपुल श्रीवास्तव, अनीता चौरसिया आदि ने भूजल सरंक्षण के प्रति लोगों को जागरूक किया। इस दौरान जगह-जगह पंफलेट भी बांटे गए।