इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि माल लेकर जा रहे ट्रक चालक का प्रथम चरण का बयान बाद के स्पष्टीकरण से ज्यादा महत्वपूर्ण है। खासकर तब जब चालक के बयान को चुनौती नहीं दी गई हो। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने मेसर्स आसर स्क्रैप ट्रेडर्स की टैक्स और जुर्माने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की एकल पीठ ने दिया है।
याची ने अगस्त 2022 में अलीगढ़ स्थित फर्म से खरीदारी की और माल को मुजफ्फरनगर स्थित फर्म को बेच दिया। उस समय सभी वैध प्रपत्र मौजूद थे। वहीं, जीएसटी सचल दल ने माल ले जा रहे वाहन को मेरठ रोड पर रोका और चालक का बयान दर्ज किया। चालक ने स्पष्ट रूप से कहा कि माल सीधे अलीगढ़ से लोड हुआ और बीच में इगलास, अलीगढ़ गोदाम पर कोई लोडिंग नहीं हुई।
चालक के बयान और कागजात में भिन्नता के आधार पर सहायक आयुक्त, मोबाइल स्क्वॉड ने जीएसटी एक्ट के तहत कार्रवाई कर कर व अर्थदंड लगाया था। याची ने अपील दाखिल की थी जिसे एडिशनल कमिश्नर मेरठ ने खारिज कर दिया तो उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि सभी दस्तावेज मौजूद थे। कर एवं अर्थदंड का आरोपण मनमाने तरीके से किया गया है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रवि शंकर पांडेय ने दलील दी कि प्रस्तुत मामले में चालक का प्रथम बयान सबसे अधिक प्रामाणिक है और उसे किसी भी स्तर पर चुनौती नहीं दी गई। अतः उस आधार पर की गई विभागीय कार्रवाई पूरी तरह से न्यायोचित है। कोर्ट ने कहा कि चालक का बयान दबाव में नहीं लिया गया और न ही उसका खंडन किया गया है। एक बार जब चालक के बयान का कोई खंडन नहीं किया गया तो उस आधार पर कार्रवाई को मनमाना नहीं कहा जा सकता।