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ज्योतिष्पीठ की गद्दी पर फिर मचा घमासान, शंकराचार्य आश्रम ने किया खंडन

Fri, 27 Nov 2020 08:37 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद - फोटो : अमर उजाला
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द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के शिष्य अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिर्मठ मठ के संचालन का पदभार सौंपे जाने की तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद माघ मेला से पहले इस पीठ पर घमासान मच गया है।
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अलोपीबाग स्थित शंकराचार्य आश्रम की ओर से ज्योतिर्मठ के कार्यभार की बात को गलत करार दिया है। रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सदस्य जगदगुरु वासुदेवानंद सरस्वती के प्रवक्ता ने शुक्रवार को कहा कि अभी इस मठ के शंकराचार्य का मामला सुप्रीमकोर्ट में विचाराधीन है। इससे पहले स्वामी स्वरूपानंद को अपने किसी शिष्य को प्रभार देना तो दूर खुद को भी शंकराचार्य कहे जाने का हक नहीं है।
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swami swaroopanand saraswati
जगदगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के बीच ज्योतिष्पीठ की गद्दी को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। हाल में ही द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के ज्योर्तिमठ पहुंचने और वहां के संचालन का पदभार ग्रहण करने की तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद यहां ज्योर्तिमठ से जुड़े लोग हैरान हैं।

ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य परामर्शदायिनी समिति के मंत्री विद्वान जी ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिष्पीठ का प्रभार सौंपने की बात अमर्यादित है। स्वामी स्वरूपानंद ज्योतिष्पीठ के न कभी शंकराचार्य थे और न हो सकते हैं। ज्योतिष्पीठ का संचालन स्वामी वासुदेवानंद के ही हाथ है।

इस बीच ज्योतिष्पीठ के प्रवक्ता ओंकार नाथ त्रिपाठी ने मठ के प्रभार की बात को निराधार बताया। प्रवक्ता के अनुसार इस प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय में अपील लंबित है और स्वरूपानंद इस पीठ पर खुद को कभी गुरु- शिष्य परंपरा के तहत तो कभी स्वयंभू पीठाधीश्वर बताते रहे हैं। सनातन परंपरा की इस सर्वोच्च पीठ को लेकर उनको ऐसा अमर्यादित कदम नहीं उठाना चाहिए था। 
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स्वामी स्वरूपानंद

स्वामी स्वरूपानंद पर दाखिल कराएंगे 420 का मुकदमा 

ज्योतिष पीठ के प्रवक्ता ओंकारनाथ त्रिपाठी बृहस्पतिवार को कहा कि पीठ के प्रभार संबंधी दुष्प्रचार को लेकर जल्द ही स्वामी स्वरूपानंद पर 420 का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वामी स्वरूपानंद आए दिन अपने शिष्य अविमुक्तेश्वरानंद के माध्यम से खुद को फर्जी रूप से ज्योतिष पीठाधीश्वर होने का प्रचार करते रहते हैं। इसके लिए उन्हें सनातन धर्म के करोड़ों अनुयायियों से माफी मांगनी चाहिए। वरना, उनके खिलाफ  420 का मुकदमा दाखिल किया जाएगा। 
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