व्यावसायिक भवनों के बढ़े गृहकर का मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। अब पार्षदों ने ऐसे भवनों के सर्वे में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाया है। इस मामले में सर्वदलीय पार्षद एवं पूर्व पार्षदों ने सोमवार को मंडलायुक्त से मुलाकात की। इस दौरान सर्वे रिपोर्ट में अनियमितता एवं एरियर समाप्त कर राहत पहुंचाने की मांग की गई।
पार्षदों ने मंडलायुक्त राजन शुक्ला को बताया कि नगर निगम प्रशासन ने व्यावसायिक भवनों के सर्वे रिपोर्ट में व्यापक अनियमितता की गई। इसे ठीक करने के साथ गृहकर एवं जलकर में वित्तीय वर्ष 2014-15 में एवं 2011 से एरियर लगा दिया गया। पार्षदों ने मंडलायुक्त से इसे समाप्त कराने की मांग की। पार्षदों ने बताया कि बढे़ गृहकर एवं जलकर के मुद्दे पर एक अप्रैल को बुलाई गई सदन की बैठक कोरम के अभाव में अनिश्चितकालीन तक स्थगित कराने के लिए महापौर और नगर आयुक्त जिम्मेदार हैं। आरोप लगाया कि नगर आयुक्त सदन में नहीं आए बल्कि अपने कैंप कार्यालय में कुछ पार्षदों के साथ बैठे रहे। यह भी आरोप लगाया कि कुछ पार्षदों को देर में आने के लिए भी कहा। कोरम के अभाव में सदन की बैठक स्थगित हो, यह रणनीति महापौर, नगर आयुक्त और कुछ पार्षदों ने बनाई थी।
आरोप लगाया कि कुछ पार्षदों ने गृहकर, जलकर के मुद्दे पर आंदोलन कर रहे पार्षदों को उनके वार्ड में 14वें वित्त आयोग एवं अस्थापना निधि से विकास कार्य न होने देने का भय दिखाया गया और मूल बजट 2016 पर विकास करने के नाम पर बैठक बुलाने की मांग पर हस्ताक्षर कराया गया। यह भी पहली बार हुआ जब कोरम के अभाव में बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित की गई। मंडलायुक्त ने मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल में पार्षद शिव सेवक सिंह, सुशील यादव, अतहर रजा लाडले, किरन जायसवाल, पुष्पा कुशवाहा, चंद्रभूषण सिंह, चंद्रशेखर बच्चा, अमित सिंह, आनंद सिंह, अभय यादव, गणेश केसरवानी, पूर्व पार्षद कमलेश सिंह, अवधेश गुप्ता, मोहम्मद मुस्लिम, चंद्रप्रकाश गंगा आदि शामिल थे।