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महाकुंभ : अखाड़ा परिषद के दूसरे गुट ने पेशवाई और शाही स्नान का बदला नाम, आमंत्रण पत्र में अमृत स्नान का उल्लेख

Wed, 06 Nov 2024 06:12 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव महंत यमुना पुरी का कहना है कि गुलामी के प्रतीक इन नामों को बदल दिया गया है। मुगल काल के नाम बदलकर हिंदी भाषा का नामकरण किया गया है। इसी कार्ड के जरिये अखाड़े के संत, महंत, महामंडलेश्वर और अन्य लोगों को आमंत्रण पत्र भेजा जा रहा है।
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महंत यमुनापुरी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गुलामी के प्रतीक नामों को बदलने को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के दोनों गुटों में खींचतान पैदा हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हुई अखाड़ा परिषद की बैठक के बाद जहां शाही स्नान की जगह राजसी स्नान और पेशवाई की जगह छावनी प्रवेश किया गया था, वहीं अब दूसरे धड़े ने नया नामकरण कर विवादों को हवा दे दी है।

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नौ अखाड़ों के बहुमत वाले परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी (निरंजनी अखाड़ा) और महामंत्री महंत हरि गिरि (जूना अखाड़ा) ने शाही स्नान की जगह राजसी स्नान और पेशवाई की जगह छावनी प्रवेश करने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद से शाही स्नान की जगह राजसी स्नान और पेशवाई की जगह छावनी प्रवेश लिखा जाने लगा था।

इस बीच दूसरे धड़े की ओर से महाकुंभ के आमंत्रण पत्र पर दूसरा नाम प्रकाशित कर विवाद खड़ा कर दिया गया है। दूसरे धड़े के अध्यक्ष महानिर्वाणी अखाड़े के महंत रवींद्र पुरी और महामंत्री महंत राजेंद्र दास हैं। महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव महंत यमुना पुरी की ओर से महाकुंभ के आमंत्रण पर शाही स्नान की जगह कुंभ मेला अमृत स्नान और पेशवाई की जगह कुंभ मेला छावनी प्रवेश यात्रा लिखा गया है। महंत यमुना पुरी अखाड़ा परिषद के दूसरे गुट से संबंधित हैं।

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संन्यासी परंपरा के अखाड़े पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के महाकुंभ के आमंत्रण पत्र में नए नामकरण को लेकर एक बार फिर विवाद पैदा हो गया है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्रपुरी (निरंजनी) का कहना है कि जिसके पास बहुमत है उसी का सर्व सम्मति से दिया नाम मान्य होगा। नामकरण का प्रस्ताव किया जा चुका है। इसके लिए अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि को नामित किया जा चुका है। रही बात दूसरे धड़े की तो उनके पास सिर्फ चार अखाड़े हैं। ऐसे में उनको महाकुंभ में इस तरह की विवादित बातें नहीं करनी चाहिए।

उधर, महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव महंत यमुना पुरी का कहना है कि गुलामी के प्रतीक नामों को बदल दिया गया है। महानिर्वाणी के आमंत्रण पत्र में दो जनवरी 2025 को कुंभ मेला छावनी प्रवेश शोभायात्रा की तिथि घोषित की गई है। इसी तरह प्रथम कुंभ अमृत स्नान 14 जनवरी, द्वितीय कुंभ अमृत स्नान 29 जनवरी और तृतीय कुंभ अमृत स्नान तीन फरवरी को लिखा गया है। जबकि, छह दिसंबर को कुंभ छावनी भूमि पूजन और 22 दिसंबर को धर्मध्वजा स्थापना की तारीख तय की गई है।
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