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शादी रचाने के फेर में दूल्हा गया जेल

Tue, 10 Feb 2015 12:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। हाईकोर्ट में झूठा हलफनामा दाखिल कर संरक्षण का आदेश प्राप्त करने के चक्कर में दूल्हे मियां को जेल काटनी पड़ गई। अदालत को गुमराह करने के आरोप में दूल्हे पर अवमानना का आरोप तय कर दिया गया है। इसके बाद कोर्ट ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में 12 फरवरी तक जेल में रखने का आदेश दिया।
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अलीगढ़ के जान मोहम्मद और तसलीम ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि उन्होंने अपनी मर्जी से शादी की है। परिवार और रिश्तेदार परेशान कर रहे हैं। दोनों बालिग हैं इसलिए उनके शांतिपूर्ण जीवनयापन में हस्तक्षेप नहीं किया जाए। जान मोहम्मद करीब पचास वर्ष का है। तसलीम भी कई बच्चों की मां बताई जाती है। एक बच्चा अदालत में उसकी गोद में था। मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने जब याचिका के तथ्यों की जांच की तो पूरा मामला संदिग्ध प्रतीत हुआ।

अदालत ने जान मोहम्मद से कई सवाल पूछे तो वह उलझ गया। उसने बताया वह अलीगढ़ से एक फरवरी को स्कार्पियो से इलाहाबाद के लिए रवाना हुआ। दो फरवरी को करीब 11 बजे इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील हफीज खान से मिला। हफीज ने उनको पहले निकाह करने की सलाह दी। राजरूपपुर स्थित एक मस्जिद में उन्होंने दो फरवरी को रात नौ बजे निकाह किया। अगले दिन सुबह 10 बजकर 50 मिनट पर जान मोहम्मद ने शपथपत्र पर हस्ताक्षर कर याचिका दाखिल की। जबकि जान का कहना था कि वह तीन फरवरी को करीब 11 बजे अपने अधिवक्ता से मिला।
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कोर्ट ने इसे फर्जीवाड़ा करार देते हुए कहा कि जाहिर है कि हलफनामा पहले से तैयार किया गया था। इसलिए याचिका में लगाए गए आरोप कि परिवार वाले दोनों को परेशान कर रहे हैं सही नहीं हो सकते हैं। जान मोहम्मद ने जानबूझकर झूठा हलफनामा देकर अदालत को गुमराह किया है। अवमानना पर उसे 12 फरवरी को अपनी सफाई देनी होगी।

अपनी मर्जी से विवाह करने वाले जोड़े हाईकोर्ट में संरक्षण के लिए याचिका दाखिल करते हैं। बालिग होने के बावजूद जब लड़का और लड़की घर से बाहर जाकर रिश्तेदारों की मर्जी के विपरीत विवाह कर लेते हैं तो अक्सर रिश्तेदार लड़के के खिलाफ अपहरण आदि को मुकदमा दर्ज करा देते हैं। कानून बालिग व्यक्ति को अपनी मर्जी से विवाह करने का अधिकार है और इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।
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